राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि देश के प्रत्येक नागरिक को सस्ती और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने निजी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों से आह्वान किया कि वे स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते समय अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को भी प्राथमिकता दें।
राष्ट्रपति मंगलवार को मुंबई स्थित लोक भवन में पीडी हिंदुजा अस्पताल द्वारा आयोजित ‘सेविंग लाइव्स एंड बिल्डिंग अ हेल्दीयर भारत’ अभियान के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रही थीं।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में उभर रहा है। ऐसे में निजी अस्पतालों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सा सेवा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का क्षेत्र है। मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार समय पर और उचित लागत पर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहे हैं। रोगों की पहचान, उपचार और प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में एआई की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा कि दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का देश में ही निर्माण किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बेहद जरूरी है। ‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) जैसी योजनाएं इस दिशा में सहायक सिद्ध हो रही हैं। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और आम नागरिक को सस्ता उपचार मिल सकेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब देश के नागरिक स्वस्थ होंगे। गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं इस दिशा में बुनियादी आवश्यकता हैं। उन्होंने सरकार के साथ-साथ सभी हितधारकों से मिलकर ‘स्वस्थ भारत’ के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरे पर मुंबई पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मू का छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने स्वागत किया।
राष्ट्रपति का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। उनके संबोधन ने निजी क्षेत्र को सामाजिक दायित्व निभाने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दिया है।