60 TB डेटा, 1.7 लाख रेस्टोरेंट और AI की पैनी नजर: ऐसे उजागर हुआ 70 हजार करोड़ का बिलिंग घोटाला

60 TB डेटा, 1.7 लाख रेस्टोरेंट और AI की पैनी नजर: ऐसे उजागर हुआ 70 हजार करोड़ का बिलिंग घोटाला

नई दिल्ली/हैदराबाद। हैदराबाद से शुरू हुई एक चर्चित बिरयानी चेन पर आयकर विभाग की कार्रवाई ने देशभर के रेस्टोरेंट उद्योग में बड़े पैमाने पर कथित टैक्स चोरी और बिलिंग हेरफेर का खुलासा किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, करीब 70,000 करोड़ रुपये तक की संदिग्ध बिलिंग अनियमितताओं का मामला सामने आया है, जो पिछले छह वर्षों से व्यवस्थित तरीके से चल रहा था।

AI और फोरेंसिक तकनीक से खुली परतें

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले का खुलासा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा एनालिटिक्स और हाई-कैपेसिटी डिजिटल फोरेंसिक जांच के जरिए संभव हो पाया। जांच के दौरान लगभग 60 टेराबाइट डिजिटल डेटा खंगाला गया, जिसमें बिक्री रिकॉर्ड, जीएसटी रिटर्न, पैन विवरण और आंतरिक सॉफ्टवेयर लॉग शामिल थे।

एआई टूल्स की मदद से लाखों ट्रांजेक्शनों का विश्लेषण किया गया, जिसमें पैटर्न मिलान (pattern matching), असामान्य बिलिंग ट्रेंड और संदिग्ध डेटा डिलीशन की पहचान की गई। अधिकारियों का कहना है कि पारंपरिक जांच पद्धतियों से इतनी बड़ी हेराफेरी पकड़ पाना बेहद कठिन था।

बिक्री रिकॉर्ड मिटाकर घटाई गई टैक्स देनदारी

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ रेस्टोरेंट चेन विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए बिक्री के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से मिटा या संशोधित कर रहे थे। इससे वास्तविक कारोबार कम दिखाया जाता था और टैक्स देनदारी घटाई जाती थी।

मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • पिछले 6 वर्षों से कथित हेरफेर जारी

  • एक सॉफ्टवेयर में 2.4 लाख करोड़ रुपये की कुल बिक्री दर्ज

  • करीब 13,000 करोड़ रुपये के बिल डिलीट किए जाने का आरोप

  • लगभग 19,400 करोड़ रुपये की बिलिंग में संशोधन

  • औसतन 14% तक बिल हटाए या बदले गए

  • अनुमानतः 27% तक बिक्री कम दिखाने की कोशिश

जांच में हजारों जीएसटी नंबर और पैन कार्ड भी संदिग्ध पाए गए हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।

1.7 लाख रेस्टोरेंट रडार पर

जांच एजेंसियां अब देशभर के करीब 1.7 लाख रेस्टोरेंट इकाइयों के डेटा का मिलान कर रही हैं। आयकर और जीएसटी विभाग मिलकर यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल अन्य प्रतिष्ठानों में भी हुआ है।

डिजिटल युग में टैक्स निगरानी सख्त

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला रेस्टोरेंट और रिटेल सेक्टर के लिए चेतावनी है। डिजिटल भुगतान और क्लाउड आधारित बिलिंग सिस्टम के दौर में सरकार के पास डेटा विश्लेषण के उन्नत साधन हैं। एआई आधारित जांच अब टैक्स चोरी के नए तरीकों को भी पकड़ने में सक्षम हो रही है।

आयकर विभाग ने संकेत दिए हैं कि आगे भी बड़े पैमाने पर डेटा एनालिटिक्स के जरिए कर अनुपालन (tax compliance) की निगरानी बढ़ाई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित संस्थानों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने कहा है कि विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे।