ईरान की कुछ महिला फुटबॉल खिलाड़ियों के देश लौटने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। ये खिलाड़ी पहले ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने की इच्छा जता चुकी थीं, लेकिन बाद में उन्होंने अपना फैसला बदलते हुए ईरान लौटने का निर्णय लिया।
ईरान लौटने पर इन खिलाड़ियों का सरकारी स्तर पर स्वागत किया गया। राज्य मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों और वीडियो में उन्हें फूलों की माला पहनाकर और बच्चों के साथ सार्वजनिक रूप से दिखाया गया। कुछ दृश्यों में खिलाड़ियों को इजराइल के झंडे पर चलते हुए भी दिखाया गया, जिसे राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने इसे देश के लिए “गौरव का क्षण” बताया। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने “देश विरोधी दबावों और प्रलोभनों के आगे झुकने से इनकार किया” और वे गर्व के साथ अपने वतन लौटी हैं।
हालांकि, विदेश में रह रहे ईरानी खिलाड़ियों और खेल जगत से जुड़े लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह स्वागत केवल दिखावे का हिस्सा हो सकता है और भविष्य में इन खिलाड़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ईरान में जन्मे जूडो खिलाड़ी सईद मोल्लाई ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में कहा कि इन खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर उन्हें गहरी आशंका है। उनके मुताबिक, “लगभग 100 प्रतिशत संभावना है कि वे सुरक्षित नहीं हैं। आगे चलकर उन्हें जेल या अन्य कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है।”
गौरतलब है कि इन खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया में आयोजित महिला एशियन कप के दौरान ईरान का राष्ट्रगान गाने से इनकार किया था, जिसे सरकार के खिलाफ विरोध के रूप में देखा गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना को ईरान सरकार अपने पक्ष में प्रचार के रूप में पेश कर रही है, जबकि वास्तविक स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में इन खिलाड़ियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।