राजपरिवारों और अरबपतियों का ‘School of Kings’: दुनिया का सबसे एलीट बोर्डिंग स्कूल

राजपरिवारों और अरबपतियों का ‘School of Kings’: दुनिया का सबसे एलीट बोर्डिंग स्कूल

स्विट्ज़रलैंड दुनिया के कुछ सबसे महंगे और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के लिए जाना जाता है, लेकिन जब बात “लेजेंडरी स्कूल” की आती है, तो Institute Le Rosey का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। यह वही स्कूल है, जिसे दुनिया भर में “School of Kings” कहा जाता है—एक ऐसा संस्थान, जहां राजपरिवारों, अरबपति उद्योगपतियों और वैश्विक एलीट वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं।

दुनिया की सबसे ऊंची फीस वाला स्कूल

Institute Le Rosey की सालाना फीस एक लाख स्विस फ़्रैंक से अधिक बताई जाती है, जो भारतीय मुद्रा में एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। इसी कारण इसे अक्सर दुनिया का सबसे महंगा बोर्डिंग स्कूल कहा जाता है। हालांकि स्कूल प्रशासन का कहना है कि यह फीस विलासिता के लिए नहीं, बल्कि सीमित क्लास साइज, उच्च गुणवत्ता वाली फैकल्टी, अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कड़ी सुरक्षा और पर्सनलाइज्ड एजुकेशन सिस्टम के लिए ली जाती है।

एडमिशन प्रक्रिया बेहद सख्त

Le Rosey में दाख़िला केवल पैसे या अच्छे अंकों के आधार पर नहीं मिलता। यहां छात्र की अकादमिक क्षमता, अंग्रेज़ी या फ्रेंच भाषा पर पकड़, व्यक्तित्व, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में रुचि और पारिवारिक पृष्ठभूमि को गहराई से परखा जाता है।
एक खास नियम यह भी है कि किसी एक देश के छात्रों की संख्या कुल स्टूडेंट्स का 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इसका मकसद कैंपस को वास्तविक अर्थों में अंतरराष्ट्रीय बनाए रखना है।

क्यों पसंद करते हैं राजपरिवार

यूरोप और मिडिल ईस्ट के कई शाही परिवार दशकों से अपने बच्चों को Le Rosey भेजते रहे हैं। इन परिवारों के लिए यह स्कूल सिर्फ शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि ऐसा मंच है, जहां बच्चे बचपन से ही वैश्विक नेटवर्क और इंटरनेशनल माइंडसेट के साथ बड़े होते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय शाही या बड़े एलीट परिवारों के नाम इस स्कूल से बहुत कम जुड़े दिखते हैं। इसकी वजह रिजेक्शन नहीं, बल्कि ऐतिहासिक शिक्षा परंपराओं और नेटवर्क की प्राथमिकताओं का अंतर माना जाता है। भारतीय एलीट वर्ग आमतौर पर भारत या ब्रिटेन के प्रतिष्ठित स्कूलों को तरजीह देता रहा है।

दो अलग-अलग कैंपस, एक अनोखा मॉडल

Institute Le Rosey दुनिया का इकलौता ऐसा बोर्डिंग स्कूल है, जहां पढ़ाई साल में दो अलग-अलग लोकेशन पर होती है।
गर्मियों में छात्र झील जिनेवा के किनारे स्थित Rolle कैंपस में पढ़ते हैं, जबकि सर्दियों में उन्हें Gstaad के पहाड़ी इलाके में बने विंटर कैंपस में शिफ्ट कर दिया जाता है। स्कूल का मानना है कि अलग-अलग मौसम और माहौल में रहकर पढ़ाई करने से बच्चों में अनुशासन, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक समझ विकसित होती है।

क्लासरूम से बाहर भी सीखने की दुनिया

Le Rosey में शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है। यहां इंटरनेशनल बैकालॉरिएट (IB) जैसे वैश्विक मान्यता प्राप्त प्रोग्राम पढ़ाए जाते हैं, जिन्हें दुनिया की प्रमुख यूनिवर्सिटीज स्वीकार करती हैं।
इसके साथ ही खेल, संगीत, थिएटर, फिल्ममेकिंग, स्कीइंग, सेलिंग, घुड़सवारी और कला जैसे क्षेत्रों में प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाती है। स्कूल का उद्देश्य छात्रों को केवल अच्छे स्टूडेंट नहीं, बल्कि भविष्य के लीडर बनाना है।

140 साल पुरानी विरासत

1880 में स्थापित Institute Le Rosey आज भी अपनी विशिष्ट शिक्षा प्रणाली और वैश्विक प्रतिष्ठा के कारण “School of Kings” के नाम से जाना जाता है। यही वजह है कि यह स्कूल आज भी दुनिया के सबसे एलीट और प्रभावशाली शैक्षणिक संस्थानों में गिना जाता है।