नई दिल्ली। अभिनेता मनोज बाजपेयी अभिनीत फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के शीर्षक को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने फिल्म के निर्माताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि किसी भी फिल्म का शीर्षक समाज के किसी वर्ग को बदनाम करने वाला नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बदला हुआ नाम बताए बिना फिल्म की रिलीज की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) को भी नोटिस जारी किया है। पीठ ने टिप्पणी की, “आप ऐसे शीर्षक का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं जिससे समाज के एक वर्ग की छवि खराब होती हो? यह नैतिकता और सार्वजनिक व्यवस्था के विरुद्ध है।”
अदालत ने फिल्म निर्माता नीरज पांडे को निर्देश दिया कि वे शपथपत्र दाखिल कर स्पष्ट करें कि फिल्म की विषयवस्तु किसी भी वर्ग को नीचा नहीं दिखाती। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि जब तक बदला हुआ शीर्षक प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक फिल्म रिलीज नहीं की जा सकेगी। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित की गई है।
फिल्म के खिलाफ दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि इसका शीर्षक जाति और धर्म आधारित स्टीरियोटाइप को बढ़ावा देता है और सांप्रदायिक सद्भाव व संवैधानिक मूल्यों के लिए खतरा पैदा करता है। यह याचिका भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा द्वारा दायर की गई है, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है।
फिल्म के नाम को लेकर कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कुछ फिल्म संगठनों ने भी शीर्षक पर आपत्ति जताई है। बढ़ते विवाद के बीच फिल्म निर्माताओं ने पहले ही शीर्षक बदलने की बात कही थी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि नया नाम आधिकारिक रूप से प्रस्तुत किए जाने के बाद ही आगे की प्रक्रिया होगी।
यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली थी। फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ नुसरत भरुचा, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय और दिव्या दत्ता प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब सबकी नजरें फिल्म के नए नाम और अगली सुनवाई पर टिकी हैं।