मुंबई। बॉलीवुड के साथ-साथ तेलुगु, तमिल और मलयालम फिल्मों में अपनी दमदार पहचान बना चुकी अभिनेत्री तापसी पन्नू ने हाल ही में साउथ फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के दौरान झेली गई असहज परिस्थितियों पर खुलकर बात की है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वहां अक्सर अभिनेत्रियों के अभिनय से ज्यादा उनके लुक्स और अपीयरेंस पर जोर दिया जाता है, जिससे कई बार सेट पर अजीब स्थिति पैदा हो जाती थी।
तापसी ने कहा कि साउथ फिल्मों में हीरोइन को ‘आकर्षक’ दिखाने के लिए खास तरह के कपड़े पहनने के निर्देश दिए जाते थे। हालांकि, समस्या कपड़ों से ज्यादा उस तरीके में थी, जिससे ये बातें सेट पर पहुंचाई जाती थीं।
उनके मुताबिक, सेट पर अभिनेत्रियों से सीधे संवाद करने के बजाय निर्देशक अपनी बात असिस्टेंट डायरेक्टर तक पहुंचाते, फिर वहां से यह बात हेयर या स्टाइल टीम तक जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कई लोग शामिल हो जाते थे, जिससे निजी विषय भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन जाते थे।
अभिनेत्री ने बताया कि कई बार गाने की शूटिंग के बीच में उन्हें अचानक बाहर जाकर अपना लुक बदलने के लिए कहा जाता था। पूरा यूनिट यह देखता रहता था कि आखिर क्या बदलाव हुआ है।
तापसी के शब्दों में, “सब लोग देखते रहते थे कि क्या फर्क आया, और कई बार हमें खुद समझ नहीं आता था कि क्या बदलना है। फिर दोबारा जाकर वही प्रक्रिया दोहरानी पड़ती थी।”
उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थितियां किसी भी अभिनेत्री के लिए शर्मनाक और असहज हो सकती हैं।
तापसी का मानना है कि कई साउथ फिल्मों में महिला किरदारों की प्रस्तुति में ग्लैमर को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि कंटेंट और अभिनय पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समय के साथ इंडस्ट्री में बदलाव आ रहा है और अब मजबूत महिला किरदारों पर भी काम हो रहा है।
तापसी पन्नू ने बॉलीवुड और साउथ—दोनों इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव साझा करते हुए कहा कि अब परिस्थितियां पहले से बेहतर हो रही हैं। नई पीढ़ी के फिल्मकार महिलाओं को अधिक सम्मानजनक और सशक्त भूमिकाओं में प्रस्तुत कर रहे हैं।
गौरतलब है कि तापसी पन्नू ने अपने करियर की शुरुआत साउथ सिनेमा से की थी और बाद में बॉलीवुड में ‘पिंक’, ‘थप्पड़’ जैसी फिल्मों से अपनी मजबूत पहचान बनाई। आज वह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की उन अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं, जो अपने बेबाक विचारों के लिए जानी जाती हैं।