सिडनी: न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स पर अपनी ही पुरानी प्रतिबद्धता को निभाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। संसद में बतौर सांसद अपने पहले भाषण में उन्होंने वादा किया था कि उनकी पार्टी पर यूनियनों के प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। लेकिन प्रस्तावित “यूनियन जासूसी” कानून (स्नूपिंग बिल) यदि मौजूदा स्वरूप में पारित हो जाता है, तो आलोचकों का कहना है कि इससे उल्टा असर पड़ेगा और यूनियनों का प्रभाव और मजबूत हो सकता है।
यह विवादित विधेयक सरकारी एजेंसियों को कार्यस्थलों और यूनियन गतिविधियों से जुड़े मामलों में व्यापक जांच और निगरानी अधिकार देने का प्रस्ताव रखता है। सरकार का तर्क है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सार्वजनिक हितों की रक्षा होगी। लेकिन विपक्ष और कुछ स्वतंत्र विशेषज्ञों का कहना है कि कानून की भाषा अस्पष्ट है और इससे राजनीतिक तथा औद्योगिक गतिविधियों में असंतुलन पैदा हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बिल में संशोधन नहीं किए गए, तो यह मिन्स की उस प्रतिबद्धता के विपरीत होगा जिसमें उन्होंने लेबर पार्टी और यूनियनों के संबंधों में संतुलन लाने की बात कही थी। आलोचकों का आरोप है कि मौजूदा प्रारूप में यह कानून यूनियनों को अप्रत्यक्ष रूप से अधिक शक्ति दे सकता है या सरकार पर उनके प्रभाव को कम करने की दिशा में कोई ठोस कदम साबित नहीं होगा।
विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि सरकार इस बिल की विस्तृत समीक्षा कराए और स्पष्ट परिभाषाएं तथा जवाबदेही के प्रावधान जोड़े। उनका कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन नागरिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से समझौता किए बिना।
उधर, सरकार के करीबी सूत्रों का कहना है कि प्रीमियर मिन्स संशोधनों के लिए तैयार हैं और संसद की समिति में सुझावों पर विचार किया जाएगा। हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में न्यू साउथ वेल्स की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि मिन्स अपने शुरुआती वादों के अनुरूप कानून में बदलाव करते हैं, तो इससे उनकी नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक संतुलन की परीक्षा होगी।