ऑस्ट्रेलिया में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ श्रमिक संगठनों का असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। देश के शीर्ष ट्रेड यूनियन संगठन ऑस्ट्रेलियन काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ACTU) ने संकेत दिए हैं कि यदि कर्मचारियों को महंगाई से अधिक वेतन वृद्धि नहीं दी गई, तो व्यापक स्तर पर औद्योगिक हड़तालें की जा सकती हैं।
ACTU की महासचिव सैली मैकमैनस ने कहा कि मौजूदा आर्थिक हालात में कामगारों की वास्तविक आय में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के बराबर वेतन वृद्धि से श्रमिकों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि कर्मचारियों को महंगाई से आगे रखने के लिए कम से कम 4 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि अनिवार्य है।
मैकमैनस के अनुसार, आवास किराया, बिजली और गैस बिल, ईंधन की कीमतें तथा खाद्य वस्तुओं के दाम बीते वर्षों में तेजी से बढ़े हैं, जबकि वेतन वृद्धि उस अनुपात में नहीं हुई। इसका सीधा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों की जीवन गुणवत्ता पर पड़ा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आने वाले वेतन समझौतों में कर्मचारियों की जायज़ मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो ट्रेड यूनियन आंदोलन को तेज किया जाएगा। ACTU का कहना है कि श्रमिकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है और वे अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो सकते हैं।
उधर, नियोक्ता संगठनों और सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वेतन वार्ता में संतुलित और व्यावहारिक रुख अपनाया जाए। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो औद्योगिक अशांति का असर देश की अर्थव्यवस्था और सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
ACTU ने सरकार से अपील की है कि वह श्रमिकों की क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए और नियोक्ताओं के साथ रचनात्मक संवाद को प्राथमिकता दे, ताकि किसी बड़े औद्योगिक टकराव से बचा जा सके।