सिडनी।
ऑस्ट्रेलिया में अवैध सिगरेट तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। सिडनी में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर उन पर $13 मिलियन (करीब 108 करोड़ रुपये) मूल्य की सिगरेट तस्करी का आरोप सिद्ध हुआ। लेकिन अदालत से उन्हें अपेक्षाकृत हल्की सजा मिलने पर अब न्याय व्यवस्था और सरकार की नीति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
तस्करी का यह मामला तब सामने आया जब सीमा शुल्क अधिकारियों ने एक शिपिंग कंटेनर की तलाशी ली। कंटेनर में घोषित सामान की जगह लाखों अवैध सिगरेट के पैकेट पाए गए। जांच में पता चला कि इस माल की कीमत बाजार में 13 मिलियन डॉलर से अधिक थी। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक खेप थी, जबकि इससे पहले और बाद में भी कई बार इस नेटवर्क के जरिए तस्करी की गई हो सकती है।
हालाँकि अदालत ने दोनों दोषियों को सजा सुनाई, लेकिन यह सजा अपेक्षित कठोरता से काफी कम रही। एक पूर्व संघीय अन्वेषक ने इस पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि इतनी बड़ी तस्करी के बावजूद इतनी हल्की सजा अपराधियों के लिए किसी ‘चेतावनी’ के बजाय ‘प्रोत्साहन’ जैसी है। उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था की कमजोरी बताया और कहा कि ऐसे फैसलों से तस्करों को लगता है कि पकड़े जाने के बावजूद उन्हें भारी नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
अवैध सिगरेट व्यापार ऑस्ट्रेलिया सरकार के राजस्व पर सीधा असर डाल रहा है। वैध तरीके से बेची जाने वाली सिगरेट पर लगने वाले टैक्स से सरकार हर साल अरबों डॉलर जुटाती है। तस्करी के कारण यह टैक्स सरकार तक नहीं पहुँचता। साथ ही, यह कारोबार संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग को भी मज़बूत करता है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि तस्करों का नेटवर्क केवल ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है और इसमें एशिया तथा मध्य-पूर्व के तस्कर गिरोह भी शामिल हैं। इन नेटवर्क्स के जरिए केवल सिगरेट ही नहीं, बल्कि अन्य अवैध सामान और नशीले पदार्थों की भी तस्करी होती है।
विशेषज्ञों और पूर्व जांच अधिकारियों ने मांग की है कि सरकार और न्यायपालिका इस तरह के अपराधों पर और कठोर कार्रवाई करें। उनका कहना है कि:
दोषियों को भारी जुर्माना लगाया जाए।
सजा इतनी कठोर हो कि भविष्य में कोई भी तस्करी का जोखिम न उठाए।
तस्करी रोकने के लिए सीमा सुरक्षा और कंटेनरों की जाँच व्यवस्था और मज़बूत की जाए।
यह मामला सिर्फ दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी और सजा का नहीं है, बल्कि यह ऑस्ट्रेलिया में तेजी से बढ़ते अवैध सिगरेट व्यापार की गंभीरता को उजागर करता है। हल्की सजा से जहां तस्कर हौसला पा रहे हैं, वहीं सरकार के राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। अब देखना यह है कि आने वाले समय में सरकार और अदालतें इस तरह के मामलों पर कितनी सख्ती से नकेल कसती हैं।