ऑस्ट्रेलिया में सैन्य बलों में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न: राजनीतिक निष्क्रियता पर सवाल

देश की सुरक्षा के दायित्व में लगे पुरुषों द्वारा महिलाओं पर हो रहे हमलों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी बनी हुई

ऑस्ट्रेलिया में सैन्य बलों में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न: राजनीतिक निष्क्रियता पर सवाल

ऑस्ट्रेलिया में देश की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले सैनिक और पुलिस कर्मी, जो समाज की रक्षा का संकल्प लेकर खड़े हैं, उनके खिलाफ महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न और बलात्कार जैसी गंभीर घटनाओं का खुलासा चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। इन मामलों में पीड़िताओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन राजनीतिक दलों और जिम्मेदार प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई निर्णायक और कड़ा कदम देखने को नहीं मिला है।

सैन्य और पुलिस बलों के भीतर यौन हिंसा के मामले इस बात का संकेत हैं कि ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित लोकतांत्रिक देश में भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गहरी समस्याएं मौजूद हैं। यह स्थिति न केवल पीड़िताओं के लिए दर्दनाक है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती है।

हालांकि मीडिया में इन घटनाओं की रिपोर्टिंग होती रही है, और कई बार सार्वजनिक जांच आयोग और पुलिस जांच भी हुई हैं, फिर भी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की कमी के कारण यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है। राजनीतिक नेतृत्व का मौन और टाल-मटोल नीति इन मुद्दों को और बढ़ावा देती है।

ऑस्ट्रेलिया की महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले कई सामाजिक संगठन, वकील, और मानवाधिकार समूह इस निष्क्रियता पर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि जहां सैनिक और पुलिस कर्मी सुरक्षा की गारंटी देते हैं, वहां महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाएं बहुत गंभीर हैं और इसे रोकने के लिए कड़े नियम, जागरूकता अभियान, और दोषियों के प्रति सख्त सजा की आवश्यकता है।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इस विषय पर राजनीतिक दलों को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए और इसे चुनावी या राजनीतिक मुद्दे से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय सुरक्षा और महिला सुरक्षा का मसला बनाना होगा।

साथ ही, पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसियां बनाना अनिवार्य है ताकि वे बिना भय के अपनी बात कह सकें। सैन्य और पुलिस बलों में ऐसी संस्कृति का विकास होना चाहिए जिसमें यौन हिंसा की कोई जगह न हो।

समाज का भी कर्तव्य है कि वे इस मुद्दे पर दबाव बनाएं और जिम्मेदार नेताओं से जवाब मांगें ताकि ऑस्ट्रेलिया में हर महिला सुरक्षित महसूस कर सके, खासकर उन स्थानों पर जहां सुरक्षा का भरोसा सबसे ज्यादा होना चाहिए।

आज समय आ गया है कि ऑस्ट्रेलिया के राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व इस संवेदनशील मसले पर चुप्पी तोड़कर महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएं