दोपहर की झपकी बन सकती है जानलेवा आदत, नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

दोपहर की झपकी बन सकती है जानलेवा आदत, नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

लंदन/बोस्टन | 28 जून 2025
दोपहर के वक्त ली जाने वाली झपकी अब सिर्फ आलस या आराम का मामला नहीं रह गया है, बल्कि एक हालिया वैज्ञानिक अध्ययन ने इसे स्वास्थ्य के लिए संभावित खतरनाक बताया है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि दोपहर 12 बजे के आसपास की झपकी लंबी उम्र में बाधक बन सकती है।

झपकी और मृत्यु दर के बीच संबंध
यह शोध प्रतिष्ठित ‘स्लीप’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें बताया गया है कि न केवल झपकी लेने का समय, बल्कि उसकी अवधि और नियमितता भी भविष्य में मृत्यु दर को प्रभावित कर सकती है। अध्ययन में यह पाया गया कि दोपहर के मध्य में ली गई झपकियां “all-cause mortality” यानी किसी भी कारण से होने वाली मौत के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

86,000 से अधिक लोगों पर शोध
यह अध्ययन यूनाइटेड किंगडम की विशाल UK Biobank परियोजना के डेटा पर आधारित है, जिसमें 43 से 79 वर्ष की आयु के 86,565 लोग शामिल थे। इनमें से 57 प्रतिशत महिलाएं थीं और किसी ने भी शिफ्ट में काम नहीं किया था। इन सभी की नींद संबंधी गतिविधियों को पहनने योग्य डिवाइस से ट्रैक किया गया, जिससे शोध ज्यादा सटीक और वस्तुनिष्ठ बन सका।

दोपहर की नींद को लेकर अब तक की मान्यताओं पर सवाल
अध्ययन की प्रमुख लेखिका और मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल की पोस्टडॉक्टोरल फेलो डॉ. चेनलू गाओ ने कहा, “हमारा अध्ययन यह दर्शाता है कि केवल झपकी लेना ही नहीं, बल्कि झपकी का समय और उसमें आने वाला उतार-चढ़ाव भी दीर्घकालिक स्वास्थ्य के संकेतक हो सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि अब तक किए गए कई अध्ययन स्वयं रिपोर्ट की गई झपकी की आदतों पर आधारित थे, जो कि अक्सर स्मृति भ्रम (recall bias) से ग्रस्त होती हैं।

क्या बदलनी चाहिए हमारी झपकी की आदतें?
इस अध्ययन के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि दिन में झपकी लेने की आदतों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। विशेष रूप से दोपहर 12 से 2 बजे के बीच की झपकी अब सिर्फ आलस या ऊर्जा के लिए ली जाने वाली छुट्टी नहीं रह गई है, बल्कि यह दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती है।

निष्कर्ष
हालांकि दोपहर की नींद कई बार शरीर को आराम देती है, लेकिन नई वैज्ञानिक समझ हमें यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि कब, कितनी और कितनी बार झपकी ली जाए — यह जीवन की गुणवत्ता और दीर्घायु के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।