लंदन, 26 जुलाई 2025 – प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के मुखर आलोचक डॉ. असीम मल्होत्रा (47) को हाल ही में एमएएचए (MAHA) इंस्टीट्यूट का मुख्य चिकित्सा सलाहकार नियुक्त किया गया है। डॉ. मल्होत्रा लंबे समय से स्टैटिन दवाओं और mRNA वैक्सीन तकनीक को लेकर अपने स्पष्ट और विवादास्पद विचारों के लिए जाने जाते हैं।
एक विशेष बातचीत में डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य प्रणाली पर घटता जन विश्वास एक 'अच्छा संकेत' हो सकता है, क्योंकि यह लोगों की बढ़ती जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "जब लोग आंख मूंदकर हर नीति या दवा पर विश्वास करना बंद कर देते हैं और सवाल पूछते हैं, तो वह स्वास्थ्य सेवा को बेहतर और पारदर्शी बनाने की दिशा में पहला कदम होता है।"
डॉ. मल्होत्रा ने विशेष रूप से यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद लोगों में mRNA वैक्सीन और दवा कंपनियों के प्रति जो संदेह उभरा है, उसे केवल ‘षड्यंत्र’ कहकर नजरअंदाज करना एक बड़ी चूक होगी।
स्टैटिन और mRNA वैक्सीन पर विरोध
डॉ. मल्होत्रा का मानना है कि स्टैटिन दवाएं, जिन्हें हृदय रोग की रोकथाम के लिए आम तौर पर दिया जाता है, कई बार बिना जरूरत दी जाती हैं और इनके साइड इफेक्ट्स को नजरअंदाज किया जाता है। इसी तरह mRNA वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता को लेकर भी उन्होंने कई बार पारदर्शिता की मांग की है।
एमएएचए संस्थान से जुड़ाव
एमएएचए इंस्टीट्यूट ने डॉ. मल्होत्रा को उनके "साहसी और स्वतंत्र चिकित्सा दृष्टिकोण" के कारण अपने संगठन से जोड़ा है। संस्थान का उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में वैज्ञानिक विवेक और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।
आगे की राह
डॉ. मल्होत्रा ने यह भी संकेत दिए कि वह आने वाले महीनों में वैकल्पिक नीतियों और जन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय दौरे करेंगे। उन्होंने कहा, "स्वास्थ्य सेवा को जनता के हित में ढालने के लिए बदलाव आवश्यक हैं – और वह बदलाव जनता के सवालों से ही शुरू होते हैं।"