कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया की सत्तारूढ़ लेबर पार्टी में प्रधानमंत्री और कोषाध्यक्ष (Treasurer) के बीच बढ़ते मतभेद अब खुलकर चर्चा का विषय बन गए हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आर्थिक सुधारों और नीतिगत दिशा को लेकर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच दूरी बढ़ रही है, जिससे सरकार के भीतर दो स्पष्ट खेमे बन गए हैं।
एक खेमे का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए साहसिक और त्वरित सुधार जरूरी हैं, जबकि दूसरा खेमे का रुख सतर्क है और वह सामाजिक असर तथा राजनीतिक जोखिम को देखते हुए धीमी गति से आगे बढ़ने की वकालत कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में प्रधानमंत्री और कोषाध्यक्ष के बीच तनाव नया नहीं है, लेकिन इस बार का टकराव केवल व्यक्तित्व या कार्यशैली का नहीं, बल्कि सुधारों की मूल दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर है।
पार्टी के भीतर बढ़ते इस मतभेद की अगली बड़ी परीक्षा आगामी बजट पेश होने पर होगी, जब प्रधानमंत्री और कोषाध्यक्ष दोनों को अपने-अपने दृष्टिकोण को नीतियों में उतारने का मौका मिलेगा। फिलहाल, सार्वजनिक मंचों पर दोनों नेता संयम बनाए हुए हैं, मगर कैनबरा के राजनीतिक गलियारों में यह खींचतान सुर्खियों में है।