भारत को धमकाना बंद करें, हम दबाव में नहीं आने वाले: रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका-नाटो को भारत का दो टूक जवाब

भारत को धमकाना बंद करें, हम दबाव में नहीं आने वाले: रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका-नाटो को भारत का दो टूक जवाब

भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिका और नाटो की हालिया चेतावनियों को सख्त लहजे में खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र रूप से फैसले लेता है और किसी भी तरह के विदेशी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।

पुरी ने एक इंटरव्यू में कहा, "मेरे बॉस (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) का दिमाग प्रेशर लेने के लिए नहीं बना है। वे केवल भारत के हित में फैसले लेते हैं।"

यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब नाटो के नवनियुक्त महासचिव मार्क रुटे ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों को चेताया था कि इससे मास्को की अर्थव्यवस्था को बल मिलता है, जो यूक्रेन युद्ध को और लंबा खींच सकता है।

हरदीप पुरी ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भारत एक जिम्मेदार लोकतांत्रिक देश है और वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक निर्णय लेता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत ने अपने नागरिकों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश की और रूस से तेल खरीदने का फैसला उसी नीति का हिस्सा है।

उन्होंने कहा, "क्या लोगों को सस्ता पेट्रोल, डीज़ल नहीं मिलना चाहिए? क्या हमें यह देखना चाहिए कि दुनिया की राजनीति क्या कह रही है, या अपने नागरिकों की ज़रूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए?"

गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे और मित्र देशों से भी रूसी तेल और गैस का बहिष्कार करने की अपील की थी। लेकिन भारत ने शुरू से ही स्पष्ट किया है कि वह केवल अपने राष्ट्रीय हितों को देखकर निर्णय लेगा।

भारत की ऊर्जा नीति पर मुख्य बिंदु:

  • भारत की प्राथमिकता: किफायती, सुलभ और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति

  • रूस से आयात: भारत अब भी डिस्काउंट पर रूसी तेल खरीद रहा है

  • वैश्विक दबाव: अमेरिका और नाटो ने हाल ही में भारत को परोक्ष रूप से चेताया

  • भारत की प्रतिक्रिया: "दबाव नहीं झेलते, फैसला केवल राष्ट्रीय हित में"

पेट्रोलियम मंत्री के इस बयान से साफ हो गया है कि भारत की ऊर्जा नीति विदेशी दबावों से नहीं, बल्कि देश के विकास और नागरिकों की जरूरतों के आधार पर निर्धारित की जाती है।