नई दिल्ली।
सरकार द्वारा प्रस्तावित नया सुपर टैक्स अब राजनीतिक दबाव और जनता के असंतोष के बीच घिर गया है। विपक्षी दलों के लगातार हमलों और जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए केंद्र सरकार अब इस विवादित कर प्रावधान पर पुनर्विचार करने को मजबूर दिखाई दे रही है।
सुपर टैक्स को लेकर संसद से लेकर सड़कों तक विरोध तेज़ हो गया है। विपक्ष ने इसे "मध्यमवर्ग और निवेशकों पर बोझ" करार दिया है, वहीं उद्योग जगत ने भी आशंका जताई है कि इससे कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। कई संगठनों ने सरकार को चेताया है कि यह टैक्स निवेश माहौल को प्रभावित करेगा।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है। माना जा रहा है कि अंतिम क्षणों में बदलाव कर राहत देने का रास्ता निकाला जा सकता है। चर्चा यह भी है कि टैक्स दर को घटाने या कुछ वर्गों को इससे बाहर रखने का विकल्प सरकार के सामने है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार सुपर टैक्स को चरणबद्ध रूप से लागू करने या फिर उच्च आय वर्ग तक ही सीमित करने का फैसला कर सकती है। इस कदम से न केवल राजनीतिक दबाव कम होगा बल्कि उद्योग और निवेशकों को भी कुछ हद तक राहत मिल सकती है।