‘सिंगल फ्रंट डोर’: 50 वर्षों बाद न्यू साउथ वेल्स की योजना क़ानून में सबसे बड़ा सुधार

‘सिंगल फ्रंट डोर’: 50 वर्षों बाद न्यू साउथ वेल्स की योजना क़ानून में सबसे बड़ा सुधार

सिडनी। न्यू साउथ वेल्स (NSW) की लेबर सरकार ने राज्य की योजना और निर्माण कानून में आधी सदी के भीतर सबसे बड़ा बदलाव करने का एलान किया है। मुख्यमंत्री क्रिस मिन्स ने मंगलवार को इस सुधार को “सिंगल फ्रंट डोर मॉडल” का नाम देते हुए कहा कि इसका मकसद योजना प्रक्रिया को तेज़, सरल और पारदर्शी बनाना है।


सुधार की ज़रूरत क्यों?

वर्तमान में NSW में निर्माण और विकास परियोजनाओं को मंज़ूरी दिलाने की प्रक्रिया जटिल, लंबी और खर्चीली मानी जाती है। आम लोगों से लेकर बड़े डेवलपर्स तक, सभी को अलग-अलग एजेंसियों और विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था न केवल आम नागरिकों को घर बनाने में बाधा डालती है बल्कि निवेश और विकास परियोजनाओं को भी धीमा करती है।


‘सिंगल फ्रंट डोर’ क्या है?

नई व्यवस्था के तहत सभी तरह की योजनाओं और प्रस्तावों को मंज़ूरी दिलाने के लिए एकीकृत प्रवेश द्वार बनाया जाएगा। इसका अर्थ है कि नागरिकों और निवेशकों को अब अलग-अलग विभागों से अनुमति नहीं लेनी होगी, बल्कि सभी स्वीकृतियां एक ही प्लेटफॉर्म से मिलेंगी।

  • आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होगी।

  • तय समय सीमा में मंज़ूरी या अस्वीकृति का जवाब मिलेगा।

  • एकीकृत निगरानी से भ्रष्टाचार और देरी की गुंजाइश कम होगी।


50 वर्षों बाद बड़ा सुधार

करीब पाँच दशकों बाद योजना कानून में इतने व्यापक स्तर पर सुधार किया जा रहा है। लेबर पार्टी ने इसे अपने चुनावी वादों में शामिल किया था। मुख्यमंत्री मिन्स ने कहा कि “लोगों को एक घर बनाने के लिए वर्षों तक इंतज़ार नहीं करना चाहिए। हमें ऐसी व्यवस्था चाहिए जो आधुनिक और व्यावहारिक हो।”


आम जनता और विशेषज्ञों की भागीदारी

राज्य सरकार ने साफ किया है कि यह सुधार किसी बंद कमरे में नहीं होगा। इसके लिए नगर निकायों, शहरी योजनाकारों, उद्योग संगठनों और आम नागरिकों से राय ली जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से

  • निर्माण क्षेत्र को गति मिलेगी,

  • रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे,

  • और आवास संकट से जूझ रहे लोगों को राहत मिलेगी।


संभावित असर

इस कानून से न सिर्फ़ घर बनाने वाले परिवारों को सुविधा मिलेगी बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की मंज़ूरी भी तेज़ी से होगी। इससे अर्थव्यवस्था को भी बल मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, कुछ आलोचकों ने आशंका जताई है कि तेज़ मंज़ूरी की प्रक्रिया अगर पारदर्शी तरीके से न लागू हुई, तो पर्यावरणीय और सामाजिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।