‘अब समय आ गया है…’ ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का कड़ा रुख, डेनमार्क पर बढ़ाया दबाव

रूस और चीन का हवाला देकर अमेरिका ने जताई सुरक्षा चिंता, यूरोप में बढ़ी बेचैनी

‘अब समय आ गया है…’ ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का कड़ा रुख, डेनमार्क पर बढ़ाया दबाव

वॉशिंगटन/कोपेनहेगन, 19 जनवरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने पुराने रुख को और सख्त करते हुए डेनमार्क को स्पष्ट चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि “अब समय आ गया है” और अमेरिका ग्रीनलैंड के मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों का हवाला देते हुए इसे अमेरिका और पश्चिमी देशों की सामूहिक सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया।

ट्रंप ने आरोप लगाया कि डेनमार्क पिछले दो दशकों में ग्रीनलैंड की रणनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहा है। उनका कहना है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की सैन्य और आर्थिक मौजूदगी लगातार बढ़ रही है, जो अमेरिका और नाटो देशों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

ट्रंप की खुली चेतावनी

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यदि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वह डेनमार्क समेत कई यूरोपीय देशों पर व्यापारिक शुल्क (टैरिफ) लगाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम दबाव बनाने के लिए उठाया जाएगा, ताकि ग्रीनलैंड की सुरक्षा व्यवस्था को अमेरिका के नेतृत्व में पुनर्गठित किया जा सके।

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान को नाटो के भीतर भी असहजता पैदा करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि डेनमार्क नाटो का सदस्य देश है और सहयोगी देशों पर इस तरह का दबाव पहले भी विवाद का कारण रहा है।

यूरोप का तीखा जवाब

डेनमार्क सरकार ने ट्रंप के रुख को अस्वीकार्य और एकतरफा दबाव करार दिया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड न तो बिक्री के लिए है और न ही किसी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला क्षेत्र। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य वहां के लोगों और डेनमार्क के संवैधानिक ढांचे के भीतर ही तय किया जाएगा।

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी सहित कई यूरोपीय देशों ने भी ट्रंप की टैरिफ धमकी को सहयोगी देशों के बीच भरोसे को कमजोर करने वाला कदम बताया है।

ग्रीनलैंड क्यों है इतना अहम

ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है और यह दुनिया के सबसे रणनीतिक इलाकों में से एक माना जाता है। यहां से उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागर पर नजर रखी जा सकती है। इसके अलावा, ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज संसाधनों और संभावित सैन्य ठिकानों की मौजूदगी इसे वैश्विक शक्तियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह आक्रामक रुख केवल ग्रीनलैंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्कटिक में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा का संकेत भी देता है।

बढ़ता वैश्विक तनाव

ट्रंप के ताजा बयान के बाद अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में फिर से तनाव देखने को मिल रहा है। जहां अमेरिका इसे सुरक्षा का मुद्दा बता रहा है, वहीं यूरोपीय देश इसे राजनीतिक और आर्थिक दबाव की रणनीति मान रहे हैं।

फिलहाल ग्रीनलैंड को लेकर विवाद और गहराने के आसार हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में बना रह सकता है।