ऑस्ट्रेलिया में नस्लीय घृणा में 'डरावनी तेजी': नस्लीय भेदभाव आयुक्त का गंभीर आरोप

ऑस्ट्रेलिया में नस्लीय घृणा में 'डरावनी तेजी': नस्लीय भेदभाव आयुक्त का गंभीर आरोप

कैनबरा — ऑस्ट्रेलिया के नस्लीय भेदभाव आयुक्त गिरीधरन शिवरामन ने बुधवार को देश में बढ़ रही नस्लीय नफरत पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इसे “डरावनी तेजी से बढ़ती घृणा” बताया और कहा कि यह ऑस्ट्रेलियाई समाज की जड़ों में गहराई तक बैठी है।

नेशनल प्रेस क्लब में अपने भाषण के दौरान श्री शिवरामन ने कहा कि देश में मौजूद ढांचागत और प्रणालीगत नस्लवाद न केवल लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक प्रगति को भी बाधित कर रहा है।

"ढांचागत नस्लवाद का मतलब सिर्फ गालियों या व्यक्तिगत भेदभाव से नहीं है," उन्होंने कहा।
"जैसे लिंगभेद केवल पुरुषों द्वारा महिलाओं के प्रति गलत व्यवहार नहीं है, वैसे ही नस्लवाद भी केवल व्यक्तिगत पूर्वाग्रह नहीं है — यह हमारे कानूनों, नीतियों, संस्थानों और सामाजिक मान्यताओं में छिपा हुआ है, जो कुछ वर्गों को हमेशा नुकसान पहुंचाते हैं।"

उन्होंने कहा कि जैसे अतीत में महिलाओं को गर्भवती होने पर नौकरी से निकालने के कानून बदले गए, वैसे ही नस्लीय असमानताओं को दूर करने के लिए भी साहसिक कदम उठाने होंगे।

श्री शिवरामन ने यह भी बताया कि कैसे अंतरराष्ट्रीय संघर्षों — विशेष रूप से गाज़ा युद्ध — ने ऑस्ट्रेलिया में यहूदी, फिलिस्तीनी, अरब और मुस्लिम समुदायों को प्रभावित किया है।

"गाज़ा युद्ध ने ऑस्ट्रेलिया में यहूदी विरोध, इस्लामोफोबिया, और नस्लीय घृणा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है," उन्होंने कहा।
"यह कहना कि कोई नस्लवाद हो रहा है, इसका मतलब यह नहीं कि किसी अन्य प्रकार के नस्लवाद को कम आँका जा रहा है। सभी घृणा के रूपों को समान रूप से गंभीरता से लेना चाहिए।"

उन्होंने एक ऐसे प्रवासी दंपति का उदाहरण भी दिया जिनके पास उच्च योग्यता थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में उनके डिग्री और अनुभव को मान्यता नहीं दी गई। वे धार्मिक उपासना के लिए जगह नहीं पा सके और करियर में भी आगे नहीं बढ़ सके क्योंकि उनके साथ कामकाजी माहौल में सांस्कृतिक दूरी और भेदभाव था।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा नवंबर में जारी "राष्ट्रीय एंटी-रैसिज़्म फ्रेमवर्क" की भी उन्होंने चर्चा की, जिसमें 63 सिफारिशें हैं जो शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून, मीडिया और कला जैसे क्षेत्रों में नस्लवाद से निपटने के लिए उपाय सुझाती हैं।

"ये समाधान केवल प्रभावित समुदायों को नहीं, बल्कि पूरे समाज को फायदा पहुंचाएंगे," श्री शिवरामन ने कहा।
"इससे न केवल लोगों की खुशहाली बढ़ेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।"

उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ से आग्रह किया कि वे इस फ्रेमवर्क को सार्वजनिक रूप से समर्थन दें और इसके कार्यान्वयन के लिए फंडिंग सुनिश्चित करें।