ABC प्रमुख ने पत्रकार की टिप्पणी पर माफी से किया इंकार, ‘नस्लवादी’ कहे जाने पर बढ़ा विवाद

ABC प्रमुख ने पत्रकार की टिप्पणी पर माफी से किया इंकार, ‘नस्लवादी’ कहे जाने पर बढ़ा विवाद

ऑस्ट्रेलियाई पब्लिक ब्रॉडकास्टर ABC के प्रबंध निदेशक ह्यू मार्क्स ने अपनी चैनल की पत्रकार इज़ाबेला हिगिंस द्वारा की गई कथित “नस्लवादी” टिप्पणी को लेकर माफी मांगने से इनकार कर दिया है। यह मामला उस समय तूल पकड़ गया जब लिबरल पार्टी की सीनेटर जसिंता नमतजिरा-प्राइस ने सीनेट कमेटी की सुनवाई के दौरान इन टिप्पणियों को “अपमानजनक और भेदभावपूर्ण” बताया।

क्या है विवाद?

सितंबर में प्रसारित हुए ABC के राजनीतिक कार्यक्रम Insiders पर पत्रकार इज़ाबेला हिगिंस ने सीनेटर प्राइस के भारतीय मूल के प्रवासियों पर दिए बयान की आलोचना करते हुए उसे “racist” (नस्लवादी) करार दिया था।
हिगिंस का कहना था कि प्राइस “जटिल नीतिगत मुद्दों को समझाने में सक्षम नहीं हैं”।

यह टिप्पणी उस बयान के बाद आई थी जिसमें सीनेटर प्राइस ने आरोप लगाया था कि सरकार “बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को इसलिए बसने दे रही है क्योंकि वे लेबर पार्टी को वोट देते हैं”। इस आलोचना के बाद प्राइस को शैडो मिनिस्ट्री से भी हटा दिया गया था।

सीनेट में गर्मागर्म बहस

सीनेट एस्टिमेट्स सुनवाई में लिबरल सीनेटर सारा हेंडरसन ने ABC पर निष्पक्षता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि हिगिंस की टिप्पणी “सीमा लांघती है”।

सीनेटर प्राइस ने भी कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा—

“मुझे एक निर्वाचित प्रतिनिधि होने के बावजूद लगातार बदनाम किया जा रहा है। यह बेहद अपमानजनक है।”

उन्होंने ABC पर आरोप लगाया कि ऐसे विश्लेषण से उन्हें “नस्लवादी” दिखाने की कोशिश की गई।

ABC प्रमुख का बचाव

ह्यू मार्क्स ने पत्रकार का बचाव करते हुए कहा कि हिगिंस की टिप्पणी सीनेटर प्राइस के बयान पर केंद्रित थी, व्यक्तिगत रूप से उन पर नहीं

मार्क्स ने कहा—

“यह टिप्पणी स्वयं सीनेटर पर नहीं थी, बल्कि उनके वक्तव्य के विश्लेषण का हिस्सा थी। इसे किसी व्यक्ति को नस्लवादी कहने के रूप में नहीं देखा जा सकता।”

हालाँकि, यह दलील सुनवाई में मौजूद सांसदों को संतोषजनक नहीं लगी। सीनेटर हेंडरसन ने कहा कि यह “अनुचित, गलत और असंतुलित पत्रकारिता का उदाहरण” है तथा ABC को अपने मानकों की समीक्षा करनी चाहिए।

निष्पक्षता पर फिर सवाल

सुनवाई के दौरान सीनेटर प्राइस और मार्क्स के बीच कई मुद्दों पर टकराव हुआ —
नेट-ज़ीरो बहस से लेकर ABC पर रूढ़िवादी आवाज़ों को पर्याप्त जगह न देने तक।

एक चरण में प्राइस ने ABC प्रमुख से पूछा कि “चैनल पर कौन-कौन से कंजरवेटिव भाष्यकार हैं?” — इस पर मार्क्स कुछ क्षणों तक मौन रहे।

विवाद अभी थमा नहीं

सीनेटर प्राइस के विवादित बयान के बाद उन्हें पार्टी के भीतर भी आलोचना का सामना करना पड़ा और अंततः उन्हें शैडो फ्रंटबेंच से हटा दिया गया
अब ABC की इस टिप्पणी को लेकर जारी विवाद ने इस राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहेगा, क्योंकि यह सिर्फ एक टिप्पणी का नहीं, बल्कि मीडिया की निष्पक्षता और राजनीति में नस्लीय संवेदनशीलता का बड़ा मुद्दा बन चुका है।