अमृतसर–चंडीगढ़ से दुबई जाने वाली कई उड़ानें रद्द, ईरान–इजराइल तनाव का सीधा असर

अमृतसर–चंडीगढ़ से दुबई जाने वाली कई उड़ानें रद्द, ईरान–इजराइल तनाव का सीधा असर

मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हालिया हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है। इसके चलते अमृतसर और चंडीगढ़ एयरपोर्ट से दुबई (UAE) जाने वाली कई उड़ानों को रद्द कर दिया गया है या उनके समय में बदलाव किया गया है।

एयरलाइन सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा कारणों और एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) में अस्थिरता के चलते उड़ानों के संचालन पर असर पड़ा है। कई विमानों को वैकल्पिक रूट से भेजने की तैयारी की जा रही है, जबकि कुछ उड़ानों को एहतियातन रद्द कर दिया गया है। यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट या कस्टमर केयर से जांचने की सलाह दी गई है।

एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग प्रभावित हुए हैं। दुबई, अबू धाबी और अन्य खाड़ी देशों की ओर जाने वाली उड़ानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

अमृतसर और चंडीगढ़ से हर दिन बड़ी संख्या में यात्री दुबई और अन्य खाड़ी देशों की यात्रा करते हैं। पंजाब और हरियाणा के हजारों लोग रोजगार और व्यवसाय के सिलसिले में UAE में रहते हैं। ऐसे में उड़ानों के रद्द होने से यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई यात्रियों ने टिकट रद्द होने या री-शेड्यूल होने की जानकारी मिलने के बाद अपनी यात्रा योजनाओं में बदलाव किया है।

ट्रैवल एजेंट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होने तक किरायों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं, विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल यात्रियों से अपील की गई है कि वे बिना पुष्टि के एयरपोर्ट न पहुंचें और अपनी उड़ान की अद्यतन जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

मिडल ईस्ट में जारी घटनाक्रम का सीधा असर अब वैश्विक विमानन क्षेत्र पर दिखने लगा है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह क्षेत्रीय स्थिति पर निर्भर करेगा।