ऑस्ट्रेलियाई पैरेंट्स ने बच्चों को फोन से दूर रखने के लिए अपनाया नया तरीका: मिल रही है $1800 की शेयर पोर्टफोलियो रिश्वत

ऑस्ट्रेलियाई पैरेंट्स ने बच्चों को फोन से दूर रखने के लिए अपनाया नया तरीका: मिल रही है $1800 की शेयर पोर्टफोलियो रिश्वत

ऑस्ट्रेलिया में बच्चों की मोबाइल फोन की लत इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब माता-पिता उन्हें डिजिटल दुनिया से दूर रखने के लिए 'रिश्वत' का सहारा ले रहे हैं। चॉकलेट या वीडियो गेम की बजाय अब कुछ पैरेंट्स अपने बच्चों को $1800 (लगभग ₹1.25 लाख) के शेयर पोर्टफोलियो की पेशकश कर रहे हैं — बस शर्त इतनी है कि वे अपने स्मार्टफोन को कुछ समय के लिए छोड़ दें।

क्या है ये 'फोन ब्राइब' स्कीम?

इस स्कीम के तहत माता-पिता बच्चों को यह ऑफर दे रहे हैं कि अगर वे एक तय समय तक सोशल मीडिया या स्मार्टफोन से दूरी बनाए रखते हैं, तो बदले में उन्हें फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट — जैसे कि शेयर बाजार में निवेश — का तोहफा मिलेगा।
यह सिर्फ एक चालाक तरीका नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों में पैसे की समझ और भविष्य की सोच विकसित करना भी है।

क्यों उठाया गया यह कदम?

विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरों में बढ़ती स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया पर निर्भरता उनके मानसिक स्वास्थ्य, नींद की गुणवत्ता और पढ़ाई पर बुरा असर डाल रही है।
कुछ परिवारों ने बताया कि जब उन्होंने यह रणनीति अपनाई, तो बच्चों ने न केवल मोबाइल से दूरी बनाई, बल्कि वे निवेश और फाइनेंशियल लिटरेसी में भी रुचि लेने लगे।

ऑस्ट्रेलियाई लोगों की क्या है राय?

हमारे स्ट्रीट इंटरव्यू में कई ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों ने इस ट्रेंड को सकारात्मक बताया। एक पैरेंट ने कहा, “ये रिश्वत नहीं, एक स्मार्ट इन्वेस्टमेंट है – बच्चों के लिए और हमारे लिए भी।” वहीं कुछ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या बच्चों को पैसे का लालच देकर डिजिटल डिटॉक्स कराया जाना सही है?

आपकी क्या राय है?

क्या भारत में भी पैरेंट्स को बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के लिए ऐसी कोई रणनीति अपनानी चाहिए? क्या ये रिश्वत है या एक दूरदर्शी कदम?