ऑस्ट्रेलिया में संभावित ईंधन संकट को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि देश में पेट्रोल का भंडार केवल लगभग 36 दिनों की जरूरत के बराबर बताया जा रहा है। हाल के दिनों में कुछ इलाकों में लोगों द्वारा पेट्रोल जमा करने की खबरें सामने आई हैं, जिससे सरकार और विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ गई है।
जानकारों का कहना है कि देशभर में बड़े-बड़े भंडारण टैंकों में पेट्रोल रखा जाता है, जो आपातकाल की स्थिति में आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि यह भंडार सामान्य परिस्थितियों में पर्याप्त माना जाता है, लेकिन वैश्विक आपूर्ति में किसी बड़ी रुकावट या अचानक मांग बढ़ने पर यह अवधि कम पड़ सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया पहले की तुलना में अब आयातित ईंधन पर अधिक निर्भर हो गया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी प्रकार की समस्या या परिवहन में बाधा आने पर घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
सरकार का कहना है कि ईंधन आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्था की जाएगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे घबराहट में पेट्रोल जमा न करें, क्योंकि इससे कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भंडारण क्षमता बढ़ाने, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की जरूरत है।
फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन भविष्य में संभावित संकट से बचने के लिए ठोस योजना बनाना जरूरी होगा।