कैनबरा/वॉशिंगटन –
ऑस्ट्रेलिया आने वाले वर्षों में अपनी विशाल खनिज संपदा के बल पर नई वैश्विक शक्ति के रूप में उभर सकता है। अमेरिका में ऑस्ट्रेलियाई राजदूत और पूर्व प्रधानमंत्री केविन रड (Kevin Rudd) ने हाल ही में कहा कि उनका देश चीन के प्रसंस्कृत खनिजों पर बनी पकड़ को तोड़ने और अमेरिका को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत उपलब्ध कराने की अनूठी स्थिति में है।
वर्तमान समय में दुर्लभ और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में चीन का दबदबा है। ये खनिज रक्षा तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा संयंत्र और आधुनिक संचार उपकरणों में अहम भूमिका निभाते हैं। रड के अनुसार, यदि ऑस्ट्रेलिया इस क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का विस्तार करता है, तो अमेरिका और पश्चिमी देशों को चीन पर निर्भरता से राहत मिलेगी।
रड ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के पास न केवल खनिजों के बड़े भंडार हैं, बल्कि खनन और निर्यात की मजबूत क्षमताएं भी मौजूद हैं। यदि इन संसाधनों का रणनीतिक उपयोग किया गया तो:
ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक शक्ति में भारी इज़ाफ़ा होगा।
अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ सामरिक साझेदारी गहरी होगी।
ऑस्ट्रेलिया की अंतरराष्ट्रीय हैसियत और प्रभाव और भी मजबूत होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की “अमेरिका फर्स्ट” नीति और चीन के साथ व्यापारिक तनाव के बीच ऑस्ट्रेलिया इन संसाधनों को रणनीतिक साझेदारी के रूप में पेश कर सकता है।
ऑस्ट्रेलिया की सरकार और उद्योग जगत अब इस दिशा में तेज़ी से काम कर रहे हैं।
खनिज प्रसंस्करण उद्योग में निवेश और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अमेरिका और यूरोप के साथ समझौते और सहयोग परियोजनाएँ आगे बढ़ाई जा रही हैं।
वैश्विक खनिज आपूर्ति शृंखला में ऑस्ट्रेलिया को केंद्रीय केंद्र (hub) बनाने की योजनाएँ बनाई जा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगले दशक में ऑस्ट्रेलिया वैश्विक खनिज आपूर्ति का एक अहम स्तंभ बन सकता है। यह न केवल उसकी आर्थिक समृद्धि को सुनिश्चित करेगा बल्कि भूराजनीतिक परिदृश्य में भी उसकी स्थिति को मजबूत करेगा।