एडिलेड | 13 जनवरी 2026
ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित एडिलेड राइटर्स वीक से फिलिस्तीनी-ऑस्ट्रेलियाई लेखिका और अकादमिक रांडा अब्देल‑फत्ताह को हटाए जाने के बाद देश-विदेश में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस फैसले के विरोध में सैकड़ों लेखकों और बुद्धिजीवियों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया है, वहीं ऑस्ट्रेलिया के यहूदी महिला संगठन ने इस समर्थन पर सवाल उठाते हुए प्रमुख नारीवादियों से “स्पष्टीकरण” की मांग की है।
ऑस्ट्रेलिया की नेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूइश वीमेन (NCJW) की अध्यक्ष लिंडा बेन‑मेनाशे ने कहा कि उन्हें इस बात पर गहरा आघात पहुंचा है कि बहस अब्देल-फत्ताह के मंच से हटाए जाने पर तो केंद्रित है, लेकिन 7 अक्टूबर को इज़राइली महिलाओं के खिलाफ हुए कथित यौन अत्याचारों को लेकर उनके बयानों पर चर्चा नहीं हो रही। संगठन का आरोप है कि लेखिका ने इन घटनाओं को नकारने या तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाले बयान दिए।
बेन-मेनाशे ने कहा कि स्वयं को नारीवादी कहने वाली कुछ जानी-मानी हस्तियां—जैसे लेखिकाएं और सार्वजनिक व्यक्तित्व—ऐसी शख्सियत के साथ खड़ी हैं जिनके बयान महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे पर संवेदनहीन रहे हैं। उन्होंने इन हस्तियों से सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करने की अपील की।
अब्देल-फत्ताह को हटाए जाने के विरोध में लगभग 180 लेखक और टिप्पणीकार एडिलेड राइटर्स वीक से हट चुके हैं। इनमें न्यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री जसिंडा अर्डर्न, ऑस्ट्रेलियाई लेखिकाएं हेलन गार्नर और कैथी लेटे, तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित लेखक भी शामिल हैं।
एडिलेड फेस्टिवल बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि बॉन्डी में हाल ही में हुई हिंसक घटना के बाद, अब्देल-फत्ताह के पुराने बयानों को देखते हुए उनका कार्यक्रम जारी रखना “सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील” नहीं होगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह से लेखिका को उस हमले से जोड़ नहीं रहे हैं।
विवाद और गहराने के बीच एडिलेड राइटर्स वीक की निदेशक लुईस एडलर ने पद से इस्तीफा दे दिया। एक खुले पत्र में उन्होंने लिखा कि लेखिका को हटाने का फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कमजोर करता है और यह संकेत देता है कि भविष्य में राजनीतिक दबाव यह तय करेगा कि कौन बोलेगा और कौन नहीं।
अब्देल-फत्ताह ने ऑस्ट्रेलियाई मीडिया से कहा कि उन्हें कार्यक्रम से हटाना “अशोभनीय” है और यह संस्थागत नस्लवाद का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना पड़ रहा है कि बॉन्डी हमले से उनका कोई संबंध नहीं है, जो अपने-आप में अपमानजनक है।
अब्देल-फत्ताह हाल ही में मैक्वेरी विश्वविद्यालय में अपने शोध को लेकर हुई जांच में निर्दोष पाई गई थीं। उनका शोध अनुदान, जिसे पहले निलंबित किया गया था, दिसंबर 2025 में बहाल कर दिया गया।
फिलहाल यह विवाद ऑस्ट्रेलिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और वैश्विक राजनीतिक संघर्षों के साहित्यिक मंचों पर प्रभाव को लेकर व्यापक बहस का रूप ले चुका है।