मुंबई।
महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के नतीजों के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के महापौर पद को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। शहरी विकास विभाग द्वारा गुरुवार को निकाली गई आरक्षण लॉटरी के अनुसार बीएमसी का मेयर पद इस बार ओपन (महिला) श्रेणी के लिए आरक्षित रहेगा। इसके साथ ही यह भी तय हुआ है कि भाजपा और शिवसेना मिलकर महिला महापौर के नाम पर सहमति बनाएंगी।
लॉटरी प्रक्रिया के तहत राज्य की सभी प्रमुख महानगरपालिकाओं में मेयर पद का आरक्षण तय किया गया। इसी क्रम में नवी मुंबई महानगरपालिका में भी मेयर पद महिला के लिए आरक्षित किया गया है, जबकि ठाणे में यह पद अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग को मिला है।
शहरी विकास विभाग के मुताबिक, नगर निकाय नियमों के तहत महापौर पद का आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए रोटेशन प्रणाली से तय किया जाता है। यह आरक्षण पहले से निर्धारित नहीं होता, बल्कि लॉटरी के जरिए घोषित किया जाता है।
जब तक लॉटरी नहीं निकलती, तब तक राजनीतिक दल मेयर पद के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं कर सकते। संविधान के 74वें संशोधन के तहत शहरी निकायों में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू है।
लॉटरी के अनुसार बृहन्मुंबई (बीएमसी) और नवी मुंबई में मेयर पद महिला के लिए आरक्षित है। वहीं ठाणे और लातूर में अनुसूचित जाति, कल्याण-डोंबिवली में अनुसूचित जनजाति, जबकि कई अन्य महानगरपालिकाओं में ओपन या ओबीसी श्रेणी के लिए आरक्षण तय किया गया है।
ओपन कैटेगरी में भाजपा के 31 पार्षद हैं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) के 20 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 11 पार्षद हैं। महिला पार्षदों की संख्या के लिहाज से भी भाजपा आगे है, जिससे महिला मेयर पद पर उसकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
लॉटरी प्रक्रिया को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने आपत्ति जताई है। पार्टी की नेता और मुंबई की पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने कहा कि पिछले दो कार्यकालों में मेयर जनरल कैटेगरी से रहे हैं, इसलिए इस बार ओबीसी या एसटी वर्ग को मौका मिलना चाहिए था। उन्होंने लॉटरी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसकी आलोचना की।