सिडनी, 15 फरवरी 2026।
ऑस्ट्रेलिया की संसद में हुई एक सुनवाई के दौरान ऐसा खुलासा हुआ जिसने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। सीनेट एस्टिमेट्स कमेटी की कार्यवाही में यह सामने आया कि सरकार को बीयर पर लगने वाले टैक्स से जितनी आमदनी होती है, वह देश के विशाल तेल और गैस निर्यात पर लगने वाले कर से भी अधिक है।
सुनवाई के दौरान निर्दलीय सीनेटर David Pocock ने ट्रेजरी के डिप्टी सेक्रेटरी से सवाल किया कि क्या यह सही है कि ऑफशोर गैस निर्यात पर लगने वाले पेट्रोलियम रिसोर्स रेंट टैक्स (PRRT) से मिलने वाला राजस्व बीयर टैक्स से कम है।
इस पर ट्रेजरी के वरिष्ठ अधिकारी ने जवाब दिया कि वित्त वर्ष 2025-26 में बीयर पर कर से लगभग 2.7 अरब डॉलर की आय होने का अनुमान है, जबकि PRRT से केवल 1.5 अरब डॉलर मिलने की संभावना है।
Petroleum Resource Rent Tax (PRRT) ऑस्ट्रेलिया के कॉमनवेल्थ जलक्षेत्र में तेल, गैस और एलपीजी की बिक्री से होने वाले “अतिरिक्त मुनाफे” पर लगाया जाने वाला 40 प्रतिशत कर है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले बड़े मुनाफे का हिस्सा जनता तक पहुंचाना है।
सीनेटर पोकॉक ने हैरानी जताते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े गैस निर्यातकों में शामिल ऑस्ट्रेलिया को बीयर टैक्स से गैस कर की तुलना में ज्यादा राजस्व मिलना चिंताजनक है। उनका सवाल था कि संसाधन संपन्न देश होने के बावजूद सरकार को गैस उद्योग से अपेक्षित कर क्यों नहीं मिल रहा।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और कई लोगों ने सरकार की कर नीति पर सवाल उठाए। आम नागरिकों का कहना है कि आम उपभोक्ताओं से ज्यादा कर वसूला जा रहा है, जबकि बड़ी कंपनियों को राहत मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि PRRT की संरचना और छूट प्रावधानों के कारण सरकार को कम राजस्व मिल रहा है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा है और कर व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है।
यह मामला आने वाले बजट सत्र में भी गर्मा सकता है, जहां संसाधन कर नीति और आम लोगों पर पड़ने वाले टैक्स बोझ को लेकर तीखी बहस की संभावना है।