विश्वविद्यालय स्नातकों की आय का खुलासा: किसे मिल रही सबसे अच्छी और सबसे खराब सैलरी

विश्वविद्यालय स्नातकों की आय का खुलासा: किसे मिल रही सबसे अच्छी और सबसे खराब सैलरी

सिडनी। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने यह साफ़ कर दिया है कि ऑस्ट्रेलिया में विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी करने के बाद अलग-अलग क्षेत्रों के स्नातकों को कितनी सैलरी मिलती है। यह रिपोर्ट छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अब शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं रही, बल्कि इसे एक बड़े निवेश की तरह देखा जाने लगा है।

छात्रों की सोच: निवेश पर रिटर्न ही मुख्य मुद्दा

ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी (ACU) की छात्रा एम्मा प्रेंडरगैस्ट ने जब अपने स्नातक कोर्स के लिए विषय चुना, तो उनकी नज़र सबसे पहले नौकरी मिलने के बाद की संभावनाओं और आय पर थी। एम्मा ने व्यायाम एवं खेल विज्ञान (Exercise & Sports Science) का अध्ययन चुना। उनका कहना है, “मैंने पढ़ाई को केवल डिग्री पाने के लिए नहीं चुना, बल्कि इस पर विचार किया कि यह मेरे करियर और भविष्य के लिए कितना लाभकारी साबित होगा।"

उसी विश्वविद्यालय के अन्य छात्र मेपल मिर्जायुन और थॉमस ली का भी मानना है कि आज के समय में स्नातक शिक्षा को सीधे-सीधे करियर अवसरों और शुरुआती वेतन से जोड़कर देखा जाता है। उनका कहना है कि छात्र अब पहले से कहीं अधिक जागरूक हो गए हैं और वे ऐसे ही विषय चुनना चाहते हैं जिनका भविष्य में मज़बूत आर्थिक मूल्य हो।

किन क्षेत्रों में मिल रही सबसे अच्छी सैलरी

रिपोर्ट के मुताबिक, स्नातक छात्रों में सबसे अच्छी सैलरी पाने वालों में चिकित्सा, डेंटिस्ट्री, इंजीनियरिंग और आईटी से जुड़े विषयों के छात्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पढ़ाई पूरी करने के बाद शुरुआती पैकेज ही काफ़ी ऊँचा होता है और समय के साथ आय कई गुना बढ़ जाती है।

  • चिकित्सा (Medicine) स्नातक उच्चतम आय अर्जित कर रहे हैं।

  • डेंटिस्ट्री (Dentistry) और इंजीनियरिंग भी शीर्ष पर बने हुए हैं।

  • आईटी एवं कंप्यूटर साइंस में भी स्नातकों को तेज़ी से नौकरी और अच्छा वेतन मिल रहा है।

सबसे कम आय वाले स्नातक

इसके विपरीत, कला, सामाजिक विज्ञान और कुछ अन्य मानविकी विषयों के स्नातकों की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बताई गई है। इन क्षेत्रों में स्नातक बनने के बाद नौकरी तो मिल जाती है, लेकिन शुरुआती वेतन काफ़ी कम होता है और करियर ग्रोथ भी धीमी रहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन विषयों में पढ़ाई करने वाले छात्रों को नौकरी पाने के लिए अतिरिक्त योग्यता या उच्च शिक्षा की ज़रूरत पड़ती है।

अभिभावकों और विश्वविद्यालयों की चुनौती

आज शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि अभिभावक और छात्र दोनों ही इसे एक लंबे निवेश की तरह देखते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों के सामने यह चुनौती है कि वे अपने पाठ्यक्रमों को समय के अनुसार बदलें और छात्रों को ऐसे अवसर प्रदान करें, जिससे पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें अच्छा रोजगार मिल सके।

ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में छात्र अपने कोर्स चुनते समय लगातार इस बात का आकलन कर रहे हैं कि आगे चलकर उन्हें क्या लाभ मिलेगा। यही वजह है कि अब विषय चयन केवल रुचि का नहीं, बल्कि आर्थिक विवेक और करियर संभावनाओं का भी प्रश्न बन चुका है।