लंदन/वॉशिंगटन।
रूस के साथ बढ़ती तनातनी और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच ब्रिटेन ने एक बड़ा रक्षा फैसला लिया है। ब्रिटिश सरकार 12 परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अत्याधुनिक F-35A स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने जा रही है। यह निर्णय न केवल ब्रिटेन की वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि NATO गठबंधन में उसकी भूमिका को भी और सशक्त करेगा।
ब्रिटिश वायुसेना पहले से ही कुछ F-35B वर्जन का इस्तेमाल कर रही है, जो वर्टिकल टेक-ऑफ और शॉर्ट लैंडिंग (VTOL) के लिए डिजाइन किए गए हैं। लेकिन अब जो F-35A वर्जन खरीदे जाएंगे, वे अमेरिका के B61-12 परमाणु बम को ले जाने में सक्षम हैं और NATO की साझा न्यूक्लियर डिटरेंस स्ट्रैटेजी में इस्तेमाल किए जाएंगे।
ब्रिटेन के इस फैसले को रूस के साथ बढ़ते तनाव और यूरोप में सामरिक संतुलन बनाए रखने की कड़ी में एक अहम कदम माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, F-35A जैसे जेट भविष्य की हाइब्रिड वारफेयर के लिहाज से बेहद जरूरी हैं क्योंकि वे दुश्मन की रडार से बचते हुए गुप्त रूप से हमला करने में सक्षम होते हैं।
क्या है F-35A की खासियतें:
पूरी तरह स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस
सुपरसोनिक गति और लंबी दूरी तक उड़ान की क्षमता
एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड दोनों तरह के हमले में सक्षम
B61-12 न्यूक्लियर बम ले जाने की क्षमता
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह खरीद "NATO की सामूहिक रक्षा नीति के तहत हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हम यूरोप की रक्षा और वैश्विक शांति सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं।"
इससे पहले जर्मनी और नीदरलैंड्स जैसे NATO सदस्य भी F-35A जेट की खरीद की घोषणा कर चुके हैं। रूस ने इस कदम पर आपत्ति जताते हुए इसे यूरोप में "तनाव बढ़ाने वाला" बताया है, जबकि NATO ने इसे "सुरक्षा के लिए जरूरी" करार दिया है।
निष्कर्षतः, ब्रिटेन का यह फैसला वैश्विक सामरिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, खासकर तब जब यूरोप में रूस और पश्चिमी देशों के बीच अविश्वास और सैन्य सक्रियता लगातार बढ़ रही है।