नई दिल्ली – भारत में डिजिटल प्रतिस्पर्धा और निष्पक्ष व्यापार को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने Alliance of Digital India Foundation (ADIF) द्वारा गूगल के खिलाफ दायर शिकायत को स्वीकार करते हुए, गूगल की एडटेक और विज्ञापन तकनीकी बाजार में कथित एकाधिकारवादी नीतियों की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
ADIF ने आरोप लगाया था कि गूगल अपनी विभिन्न सेवाओं को जोड़कर और प्राथमिकता देकर प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। खासकर डिस्प्ले विज्ञापन सेवाओं और एडटेक मध्यस्थता सेवाओं में गूगल की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
ADIF का कहना है कि गूगल अपने प्रकाशक विज्ञापन सर्वर (DFP) को अपने विज्ञापन एक्सचेंज (AdX) के साथ बंडल कर रहा है, जिससे स्वतंत्र एडटेक कंपनियों को बाजार में पैर जमाने का मौका नहीं मिल रहा। इसके अलावा, यूट्यूब विज्ञापनों की पहुंच को सिर्फ गूगल के Demand-Side प्लेटफॉर्म (DV360) के माध्यम से संभव बनाना, बाजार के लिए हानिकारक बताया गया है।
CCI ने माना कि यह मामला "प्रथम दृष्टया" प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 4 (प्रभुत्व के दुरुपयोग) के अंतर्गत आता है, और इसकी जांच आवश्यक है। आयोग ने इस मामले को पहले से चल रहे चार अन्य मामलों के साथ जोड़ने का निर्णय लिया है, और महानिदेशक (DG) को जांच कर एक समेकित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
गूगल ने इस जांच आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“हम CCI के आदेशों की समीक्षा कर रहे हैं। हम उस फैसले का स्वागत करते हैं जिसमें शिकायत का एक हिस्सा खारिज किया गया है। हमें पूरा भरोसा है कि हमारी नीतियां विज्ञापनदाताओं, प्रकाशकों और उपयोगकर्ताओं के हित में हैं और प्रतिस्पर्धा कानूनों के अनुसार हैं।”
ADIF का दावा है कि स्टार्टअप्स और छोटे एडटेक खिलाड़ियों के लिए बाजार में प्रवेश के रास्ते बंद किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ गूगल की व्यावसायिक रणनीति नहीं, बल्कि डिजिटल स्वतंत्रता और बाजार न्याय का हनन है।
CCI ने गूगल के खिलाफ ADIF की एक अन्य शिकायत को खारिज भी किया, यह कहते हुए कि संबंधित मुद्दों की पहले ही जांच हो चुकी है। आयोग ने कहा कि ADIF उस शिकायत में कोई नया पहलू पेश नहीं कर सका।