वॉशिंगटन/कैनबरा:
ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्यक्ष जिम चाल्मर्स वैश्विक अनिश्चितता के दौर में देश के अहम खनिज संसाधनों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखने के लिए अमेरिका की यात्रा पर निकल पड़े हैं। वॉशिंगटन में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों में वह जी7 देशों के वित्त मंत्रियों के साथ-साथ भारत, मेक्सिको और दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।
इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को मजबूत और विविध बनाना है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और आधुनिक रक्षा उपकरणों के लिए ये खनिज बेहद जरूरी माने जाते हैं। मौजूदा वैश्विक हालात में पश्चिमी देश चीन पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रहे हैं, और ऑस्ट्रेलिया खुद को एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में पेश करना चाहता है।
यात्रा से पहले जिम चाल्मर्स ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बड़े बदलावों से ऑस्ट्रेलियाई श्रमिकों और कारोबारों को सीधा लाभ दिलाना उनकी प्राथमिकता है। उनके मुताबिक दुनिया को जिन अहम खनिजों की जरूरत है, उनमें ऑस्ट्रेलिया के पास प्रचुर भंडार है और यही देश के लिए एक बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा कि मजबूत और विविध आपूर्ति शृंखलाओं से सभी को फायदा होगा, लेकिन इसका सबसे बड़ा लाभ ऑस्ट्रेलिया को मिल सकता है। चाहे प्राकृतिक संसाधन हों, नवीकरणीय ऊर्जा हो, कौशल हो या राजनीतिक-आर्थिक स्थिरता—ऑस्ट्रेलिया के पास वह सब कुछ है जिसकी दुनिया को इस समय जरूरत है।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब चीन खनन और परिष्करण के क्षेत्र में अहम खनिजों पर अपना दबदबा बनाए हुए है। हाल के वर्षों में चीन की ओर से कुछ दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लगाए जाने से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में चिंता बढ़ी है, खासकर रक्षा और उच्च-तकनीक उद्योगों को लेकर।
इसी पृष्ठभूमि में ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच हाल ही में एक बड़े द्विपक्षीय समझौते पर सहमति बनी है, जिसके तहत दोनों देशों में अरबों डॉलर की परियोजनाओं को ऋण, इक्विटी निवेश और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। माना जा रहा है कि जिम चाल्मर्स की यह यात्रा वैश्विक मंच पर ऑस्ट्रेलिया की भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।