चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश की त्रिपक्षीय बैठक

चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश की त्रिपक्षीय बैठक

बीजिंग/नई दिल्ली, 21 जून 2025
चीन ने पहली बार पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ त्रिपक्षीय विदेश सचिव स्तरीय बैठक का आयोजन कर एक नया कूटनीतिक समीकरण पेश किया है, जिसे भारत के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। यह बैठक युन्नान प्रांत के कुनमिंग शहर में आयोजित की गई, जहां चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइदॉन्ग, बांग्लादेश के कार्यवाहक विदेश सचिव रूहुल आलम सिद्दीकी और पाकिस्तान की विदेश सचिव आमना बलूच (वर्चुअली) शामिल हुए।

भारत को किनारा करने की कोशिश?
इस बैठक में व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, समुद्री सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में त्रिपक्षीय सहयोग को गहराने की बात कही गई। हालांकि, चीन ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह पहल किसी “तीसरे पक्ष” के खिलाफ नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ इसे भारत के लिए एक अप्रत्यक्ष संदेश के रूप में देख रहे हैं।

नई दिल्ली की नजरें सतर्क
विदेश नीति विश्लेषकों का मानना है कि चीन का यह प्रयास दक्षिण एशियाई क्षेत्र में अपने प्रभाव को बढ़ाने और भारत को कूटनीतिक रूप से घेरने का हिस्सा हो सकता है। खासकर तब, जब बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच 15 वर्षों के बाद द्विपक्षीय वार्ता का सिलसिला फिर से शुरू हुआ है।

मोहम्मद यूनुस की भूमिका और भारत पर निशाना
बैठक ऐसे समय पर हुई जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जो नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के प्रभाव में मानी जा रही है, पाकिस्तान के प्रति अधिक नरम रवैया अपना रही है। यूनुस ने हाल ही में भारत पर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को शरण देने के लिए सार्वजनिक रूप से आलोचना की और उनके प्रत्यर्पण की मांग की थी, जिस पर भारत सरकार ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

भविष्य की राह और भारत की कूटनीतिक चुनौती
त्रिपक्षीय बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि तीनों देश एक स्थायी वर्किंग ग्रुप का गठन करेंगे, जो सहयोगी परियोजनाओं के क्रियान्वयन और समझौतों के पालन की निगरानी करेगा। हालांकि अभी तक किसी स्पष्ट समझौते की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन भारत के लिए यह संकेत स्पष्ट हैं कि दक्षिण एशिया में नई ध्रुवीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

निष्कर्ष:
इस बैठक को नजरअंदाज करना भारत के लिए एक रणनीतिक भूल साबित हो सकती है। आवश्यकता है कि भारत अपनी पड़ोसी नीति में संतुलन लाते हुए बांग्लादेश के साथ संवाद और सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करे, ताकि चीन-पाक गठबंधन के माध्यम से बन रहे नए समीकरण का प्रभाव सीमित किया जा सके।