आर्थिक सुधार वार्ता में पहले ही दिन टकराव

नियोक्ताओं ने यूनियन के प्रशिक्षण कर प्रस्ताव को ठुकराया

आर्थिक सुधार वार्ता में पहले ही दिन टकराव

आर्थिक सुधार पर चल रही उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक के पहले ही दिन मज़दूर संगठनों और नियोक्ताओं के बीच बड़ा टकराव देखने को मिला।

यूनियनों ने बैठक में एक विशेष “प्रशिक्षण उपकर (ट्रेनिंग लेवी)” लागू करने का प्रस्ताव रखा। उनका तर्क है कि इससे श्रमिकों को नए कौशल हासिल करने और बदलते उद्योग की ज़रूरतों के मुताबिक तैयार होने में मदद मिलेगी। यूनियनों के अनुसार, यह योगदान कंपनियों से लिया जाए ताकि कौशल विकास योजनाओं को मज़बूती मिल सके।

लेकिन नियोक्ता संगठनों ने इस सुझाव को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि इस तरह का कर उद्योगों पर लगभग 4.5 अरब डॉलर (करीब 37 हजार करोड़ रुपये) का अतिरिक्त वार्षिक बोझ डालेगा। उद्योग जगत के नेताओं ने चेतावनी दी कि इससे निवेश और विकास की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी और अंततः रोज़गार सृजन पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।

बैठक के दौरान माहौल कई बार गरमा गया। एक ओर यूनियन प्रतिनिधि इसे श्रमिक हित में जरूरी बता रहे थे, वहीं दूसरी ओर नियोक्ता पक्ष ने इसे “कौशल कर” कहकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले से ही कंपनियां महँगाई, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और उत्पादन लागत से जूझ रही हैं। ऐसे में नया बोझ डालना अर्थव्यवस्था के लिए उचित नहीं होगा।

आर्थिक सुधार वार्ता का मकसद सरकार, उद्योग और मज़दूर संगठनों के बीच साझा समझ बनाना है। लेकिन पहले ही दिन इस टकराव ने यह साफ कर दिया कि कई अहम मुद्दों पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।

👉 अगली बैठकों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस विवादास्पद “प्रशिक्षण उपकर” प्रस्ताव को आगे बढ़ाएगी या किसी नए समझौते की राह निकलेगी।