ऑस्ट्रेलिया के टॉप 100 प्राइवेट स्कूलों की सूची में किसका दबदबा

ऑस्ट्रेलिया के टॉप 100 प्राइवेट स्कूलों की सूची में किसका दबदबा

ऑस्ट्रेलिया में पहली बार देश के टॉप 100 निजी स्कूलों की एक निर्णायक सूची सामने आई है – और ये सूची केवल आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है, न कि लोकप्रियता या प्रतिष्ठा पर। इस रिपोर्ट ने को-एड (सहशिक्षा) और सिंगल सेक्स (एकल लिंग – केवल लड़के या केवल लड़कियों) स्कूलों की प्रतिस्पर्धा में एक स्पष्ट विजेता को सामने ला दिया है।

आंकड़ों ने खोला सच्चाई का पर्दा

शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से यह बहस चल रही है कि कौन-सा वातावरण छात्रों के लिए बेहतर है – सहशिक्षा वाला या केवल लड़कों/लड़कियों के लिए बना स्कूल। इस नई रिपोर्ट ने इस बहस को नया मोड़ दे दिया है। आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई इस सूची में सिंगल सेक्स स्कूलों का दबदबा साफ देखने को मिला है।

टॉप रैंकिंग में सिंगल सेक्स स्कूलों का वर्चस्व

रिपोर्ट में पाया गया कि टॉप 100 में अधिकांश स्कूल सिंगल सेक्स हैं – विशेष रूप से लड़कियों के स्कूलों ने बेहतर प्रदर्शन किया। टॉप 20 में तो करीब दो-तिहाई स्कूल सिंगल सेक्स कैटेगरी के हैं। इसका मतलब यह है कि ऑस्ट्रेलिया में एकल लिंग आधारित शिक्षा मॉडल अभी भी बहुत प्रभावशाली और सफल माना जा रहा है।

को-एड स्कूल भी पीछे नहीं

हालांकि, यह नहीं कहा जा सकता कि को-एड स्कूलों का प्रदर्शन कमजोर रहा। कई सहशिक्षा वाले स्कूल भी इस सूची में ऊंची रैंक पर हैं, लेकिन कुल आंकड़ों के आधार पर देखें तो सिंगल सेक्स स्कूलों ने बढ़त बना ली है।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षाविदों का मानना है कि सिंगल सेक्स स्कूलों में छात्रों का ध्यान भटकने की संभावना कम होती है और वे बेहतर अकादमिक प्रदर्शन कर पाते हैं। वहीं, को-एड स्कूल समर्थक कहते हैं कि मिश्रित माहौल में बच्चे सामाजिक रूप से अधिक संतुलित और व्यवहारिक रूप से परिपक्व बनते हैं।