सिडनी, 2 अक्टूबर 2025 – ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े बैंक, कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (CBA), ने आखिरकार यह स्वीकार कर लिया है कि हाल ही में की गई 283 छंटनियों के बीच दो पद भारत में शिफ्ट किए गए। यह खुलासा तब हुआ जब बैंक ने पहले इन आरोपों को खारिज कर दिया था और दावा किया था कि भारत में भरे जा रहे पद ऑस्ट्रेलिया में हटाए जा रहे पदों से अलग हैं।
जून 2025 में CBA ने अपने तकनीकी और रिटेल विभागों में 283 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इसी दौरान बैंक ने बेंगलुरु स्थित अपने “CBA इंडिया” कार्यालय में तकनीकी क्षेत्र के लिए बड़ी संख्या में भर्तियाँ शुरू कीं। इस पर फाइनेंस सेक्टर यूनियन (FSU) ने फेयर वर्क कमीशन (FWC) में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि यह छंटनी वास्तविक नहीं है, क्योंकि जिन पदों को ऑस्ट्रेलिया में हटाया जा रहा था, वही काम भारत में भर्ती कर कर्मचारी कर रहे थे।
बैंक ने शुरुआत में इस आरोप से इनकार किया और कहा कि भारत में नियुक्त भूमिकाएँ अलग प्रकृति की हैं। लेकिन FSU की मांग पर जब फेयर वर्क कमीशन ने समीक्षा कराई, तो पता चला कि ऑस्ट्रेलिया में हटाए गए दो “प्रोडक्ट ओनर” पद भारत में मौजूद कर्मचारियों द्वारा संभाले जा रहे थे।
FSU की राष्ट्रीय सचिव जूलिया एंग्रिसानो ने बैंक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा,
“कॉमनवेल्थ बैंक ने चुपचाप नौकरियों को ऑफशोर करने की कोशिश की। अगर हमने चुनौती नहीं दी होती तो ये नौकरियाँ बिना किसी जवाबदेही के गायब हो जातीं। यह केवल पारदर्शिता का मामला नहीं है, बल्कि देश के कर्मचारियों के साथ न्याय का सवाल है।”
यूनियन ने यह भी दावा किया कि इस विवाद के बाद बैंक ने भारत में भर्तियों के लिए जारी किए गए करीब 30 ऑनलाइन विज्ञापन वापस ले लिए, जिनके पदनाम वही थे जो ऑस्ट्रेलिया में हटाए गए थे।
बैंक के प्रवक्ता ने माना कि 283 पदों की समीक्षा के दौरान दो पद ऐसे पाए गए, जो भारत में शिफ्ट हुए थे। उन्होंने कहा कि यह जानकारी फेयर वर्क कमीशन और यूनियन दोनों को दे दी गई है।
प्रवक्ता के अनुसार,
“हमने यह स्पष्ट किया कि जून 2025 में घोषित छंटनी के दौरान कुछ भूमिकाएँ अब आवश्यक नहीं थीं। समीक्षा पूरी हो चुकी है और मामला निपटा लिया गया है।”
FSU का कहना है कि पिछले एक वर्ष में भारत स्थित CBA कार्यालय के कर्मचारियों की संख्या 21 प्रतिशत बढ़कर 6,788 हो गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बैंक लगातार अपने परिचालन का बड़ा हिस्सा विदेश में शिफ्ट कर रहा है।
यूनियन ने मांग की है कि बैंक भविष्य में किसी भी प्रकार की ऑफशोरिंग तुरंत बंद करे।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कॉमनवेल्थ बैंक ने 2025 वित्त वर्ष के लिए 10.25 अरब डॉलर का रिकॉर्ड कैश प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले वर्ष से 4 प्रतिशत अधिक है। बैंक इस साल शेयर बाजार में भी सबसे मूल्यवान कंपनी बना हुआ है।
लेकिन आलोचकों का कहना है कि जब बैंक अरबों का मुनाफा कमा रहा है तो उसे स्थानीय नौकरियाँ बचाने की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए। जुलाई में भी बैंक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित “वॉयस-बॉट” लागू करने के नाम पर 45 पद खत्म करने की घोषणा की थी, हालांकि कर्मचारियों के विरोध के बाद यह फैसला वापस ले लिया गया।