पुलिस अधिकारी ने नस्लीय पूर्वाग्रह के चलते की थी फायरिंग: कोरोनर रिपोर्ट

पुलिस अधिकारी ने नस्लीय पूर्वाग्रह के चलते की थी फायरिंग: कोरोनर रिपोर्ट

मेलबर्न/सिडनी, 7 जुलाई 2025

ऑस्ट्रेलिया में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील मामले में कोरोनर ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि उत्तरी क्षेत्र के पूर्व पुलिस अधिकारी ज़ाचरी रोल्फ (Zachary Rolfe) ने 2019 में 19 वर्षीय आदिवासी किशोर कुमनजायी वॉकर (Kumanjayi Walker) की हत्या नस्लीय पूर्वाग्रह (racism) के चलते की थी।

यह रिपोर्ट कुमनजायी वॉकर की मौत पर चली लंबी न्यायिक जांच (inquest) के बाद सामने आई है, जिसमें गवाही, सबूत और पुलिस विभाग की कार्यशैली की बारीकी से जांच की गई। कोरोनर एलिज़ाबेथ अरम्स्ट्रॉन्ग ने कहा कि ज़ाचरी रोल्फ की सोच और व्यवहार में गहरी नस्लीय धारणा झलकती है, जिसने इस दुखद घटना को जन्म दिया।

क्या था मामला?

9 नवंबर 2019 को उत्तरी क्षेत्र के युएन्डूमू (Yuendumu) समुदाय में रहने वाले कुमनजायी वॉकर को एक वॉरंट के सिलसिले में गिरफ्तार करने पहुंचे ज़ाचरी रोल्फ ने तीन बार गोली चलाई थी, जिससे वॉकर की मौत हो गई। घटना के बाद ऑस्ट्रेलिया में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे और यह मामला देशभर में नस्लीय भेदभाव और पुलिस की जवाबदेही का प्रतीक बन गया।

अदालत में क्या हुआ?

रोल्फ पर हत्या का आरोप लगाया गया था लेकिन 2022 में उन्हें आपराधिक मुकदमे में दोषमुक्त कर दिया गया था। हालांकि, इसके बाद शुरू हुई कोरोनर जांच ने उनके व्यवहार, कार्यप्रणाली और पुलिस बल के भीतर व्याप्त नस्लीय प्रवृत्तियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।

कोरोनर की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पुलिस विभाग ने वॉकर की गिरफ़्तारी को जिस तरीके से अंजाम दिया, वह सामुदायिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक संवेदनशीलता से रहित था। रिपोर्ट में उत्तरी क्षेत्र की पुलिस सेवा को आवश्यक सुधारों की सिफारिश भी की गई है।

आदिवासी समुदाय की प्रतिक्रिया

कुमनजायी वॉकर के परिवार और समुदाय ने कोरोनर की रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा है कि यह न्याय की दिशा में एक कदम है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने ज़ाचरी रोल्फ के खिलाफ फिर से कानूनी कार्यवाही की मांग की है और पूरे पुलिस सिस्टम में बदलाव की अपील की है।