कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने खुलासा किया है कि देश में सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए उन्होंने दर्जनों वीज़ा को रद्द किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का उद्देश्य देश में नफरत फैलाना और समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करना है, उन्हें ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल उन लोगों के खिलाफ है जो अपनी सार्वजनिक बयानबाज़ी से नफरत को बढ़ावा देते हैं। बर्क ने कहा, "अगर कोई व्यक्ति ऑस्ट्रेलिया आकर समाज को बांटना चाहता है, तो हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि वह कहीं और जाए, हमें उसकी ज़रूरत नहीं है।"
पत्रकार पेट्रिशिया कार्वेलास से बात करते हुए टोनी बर्क ने कहा कि वीज़ा नीति में ‘फ्री स्पीच’ (स्वतंत्र अभिव्यक्ति) की आड़ में नफरत को बढ़ावा देना स्वीकार नहीं है। उन्होंने बताया कि यह प्रावधान ऑस्ट्रेलियाई आव्रजन कानून में पहले से मौजूद है, लेकिन यह मंत्री के विवेक पर निर्भर करता है कि वह इसका प्रयोग कब और कैसे करें।
बर्क ने स्वीकार किया कि उनके कार्यकाल के दौरान लगभग 100 वीज़ा रद्द किए गए, जिनमें से दर्जनों वीज़ा ऐसे व्यक्तियों के थे जो सामाजिक असंतोष फैला सकते थे। उन्होंने बताया कि वीज़ा निरस्तीकरण का निर्णय व्यक्ति की पिछली टिप्पणियों, आपराधिक इतिहास और संभावित सार्वजनिक प्रभाव के आधार पर लिया जाता है।
टोनी बर्क ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी रैपर कान्ये वेस्ट और कट्टर दक्षिणपंथी विचारक कैंडेस ओवेन्स जैसे लोगों के वीज़ा को अस्वीकार किया क्योंकि उनके विचार समाज में नफरत फैलाने वाले थे। उन्होंने कहा, "यदि कोई व्यक्ति हजारों लोगों के सामने बोलने वाला है और उसका इतिहास भड़काऊ है, तो हम उसे गंभीरता से जांचते हैं।"
टोनी बर्क ने फ्री स्पीच के पैरोकारों की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे लोग अक्सर खुद कभी नस्लीय भेदभाव का सामना नहीं करते। उन्होंने मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष लॉरेन फिनले की आलोचना को भी खारिज किया और कहा कि ऐसे लोग नफरत भरे भाषणों के प्रभाव को नहीं समझते।
उन्होंने विपक्ष के नेता टिम विल्सन पर भी तीखा हमला करते हुए उनके उस आरोप को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि 2019 में बर्क ने एक कट्टर इस्लामी विचारक के लिए वीज़ा का समर्थन किया था। बर्क ने इसे ‘झूठा और मानहानिकारक’ बताया।
पैलेस्टाइन को मान्यता देने के मुद्दे पर बर्क ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा इनपुट नहीं देखा जिससे यह प्रतीत हो कि इससे ऑस्ट्रेलिया में हिंसा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह एक मानवीय मुद्दा है और फिलिस्तीनी लोगों की गरिमा की रक्षा के लिए यह कदम महत्वपूर्ण हो सकता है।
बर्क ने यह भी कहा कि दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में यह मान्यता एक मजबूत कदम होगा और इससे शांति को बढ़ावा मिलेगा।
टोनी बर्क ने बताया कि इस्लामोफोबिया पर विशेष दूत आफताब मलिक की रिपोर्ट जल्द ही उनके पास पहुंचेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म आधारित नफरत को कवर करने के लिए विशेष प्रयास जरूरी हैं क्योंकि मौजूदा नफरत विरोधी कानूनों में धर्म के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं है।
जनरल स्किल्स वीज़ा के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं है और पिछले वर्ष के निर्धारित संख्यात्मक आधार पर आवेदनों की समीक्षा चल रही है। राज्यों के साथ परामर्श के बाद जल्द ही नई संख्या घोषित की जाएगी।