तस्मानिया का 5 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट अधर में लटका, सरकार बिजली दरों पर 'कड़वा सच' छिपा रही है

तस्मानिया का 5 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट अधर में लटका, सरकार बिजली दरों पर 'कड़वा सच' छिपा रही है

तस्मानिया को "रिन्यूएबल्स बैटरी ऑफ द नेशन" (देश की अक्षय ऊर्जा बैटरी) बनाने के सपने को झटका लगा है, क्योंकि 5 अरब डॉलर की लागत वाला Marinus Link परियोजना अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।

यह महत्वाकांक्षी योजना मुख्यभूमि ऑस्ट्रेलिया और तस्मानिया को एक पनबिजली और पवन ऊर्जा केबल लिंक के ज़रिए जोड़ने का प्रयास है। परियोजना का लक्ष्य यह है कि तस्मानिया की अक्षय ऊर्जा को पूरे देश में वितरित किया जा सके। लेकिन अब इस परियोजना का भविष्य हवा में लटका हुआ प्रतीत हो रहा है।

सूत्रों के अनुसार, सरकार जानबूझकर उस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं कर रही जिसमें Marinus Link से जुड़ी संभावित बिजली दरों में बढ़ोतरी को बताया गया है। इस रिपोर्ट को ‘अप्रिय’ और 'राजनीतिक रूप से संवेदनशील' बताया जा रहा है।

क्या है Marinus Link?
Marinus Link एक 1500 मेगावॉट क्षमता की विद्युत इंटरकनेक्टर परियोजना है, जो तस्मानिया और विक्टोरिया के बीच समुद्र के नीचे केबल के माध्यम से अक्षय ऊर्जा का आदान-प्रदान सुनिश्चित करेगी। इसके दो चरणों में पूरा होने की उम्मीद थी – लेकिन अब इसकी लागत और व्यावहारिकता पर सवाल उठने लगे हैं।

सरकार की चुप्पी पर सवाल
विपक्षी नेताओं और ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस परियोजना से बिजली दरों में बड़ा उछाल आने वाला है, तो जनता को इसका सच जानने का हक है।

हिंदीगौरव की समझ
Marinus Link को लेकर जो उम्मीदें थीं, वे अब संदेह के घेरे में हैं। सरकार की चुप्पी और रिपोर्ट को दबाने की कोशिशें यह दिखाती हैं कि तस्मानिया को 'ग्रीन पॉवर हब' बनाने का सपना फिलहाल अधूरा ही लग रहा है।

यदि परियोजना रद्द होती है या टलती है, तो न केवल तस्मानिया की अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की ऊर्जा संक्रमण नीति को भी बड़ा धक्का पहुंचेगा।