कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया में लेबर सरकार ने सूचना की स्वतंत्रता (Freedom of Information – FOI) कानून के तहत बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। इस बदलाव के बाद आम नागरिकों को संघीय स्तर पर अधिकांश दस्तावेज़ों तक पहुँचने के लिए अब अग्रिम शुल्क (upfront fees) चुकाना होगा। सरकार का दावा है कि यह कदम सार्वजनिक सेवकों को खुलकर राय रखने का अवसर देगा, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह पारदर्शिता पर सबसे बड़ा आघात साबित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले पंद्रह वर्षों में यह सूचना तक पहुँच पर सबसे बड़ा प्रतिबंध होगा। अभी तक नागरिक मामूली शुल्क या निशुल्क दस्तावेज़ हासिल कर सकते थे, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर नज़र रखना आसान था। नए नियम लागू होने के बाद यह प्रक्रिया महँगी और कठिन हो जाएगी, जिससे आम जनता की भागीदारी प्रभावित होगी।
लेबर सरकार ने इस बदलाव को सही ठहराते हुए कहा कि इससे सरकारी अधिकारी बिना किसी झिझक अपनी राय दे सकेंगे। उनका मानना है कि यदि हर दस्तावेज़ आसानी से सार्वजनिक हो जाएगा, तो नौकरशाही नीतिगत चर्चाओं में खुलकर हिस्सा नहीं ले पाएगी। इसलिए अग्रिम शुल्क लगाने से ऐसी स्थिति से बचा जा सकेगा।
विपक्षी दलों और सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि यह योजना जनता के अधिकारों पर सीधा हमला है। आलोचकों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को सरकारी दस्तावेज़ों तक सस्ती और आसान पहुँच मिलना बेहद ज़रूरी है। यदि सूचना तक पहुँच महँगी होगी तो जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों कमज़ोर हो जाएँगी।
FOI कानून का मकसद ही जनता और सरकार के बीच पारदर्शिता को मज़बूत करना था। लेकिन नए बदलाव से न सिर्फ मीडिया और शोधकर्ताओं का काम कठिन होगा, बल्कि साधारण नागरिक भी सरकारी फैसलों की समीक्षा करने से वंचित रह जाएँगे। इससे सरकार और जनता के बीच भरोसे की खाई और गहरी हो सकती है।