5 अगस्त 2019 – यह वह तारीख है जब मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया था और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख – में विभाजित कर दिया गया था। इस फैसले को आज पूरे छह साल हो चुके हैं, और अब 5 अगस्त 2025 की तारीख आते ही राजनीतिक हलचलें एक बार फिर तेज़ हो गई हैं।
सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने पर गंभीर मंथन कर रही है। बीते कुछ हफ्तों से दिल्ली से लेकर श्रीनगर तक बैठकों का सिलसिला जारी है, और गृहमंत्रालय ने भी इस विषय पर उच्च स्तरीय चर्चा की है।
जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक दलों के नेताओं की दिल्ली में बढ़ती सक्रियता और गृहमंत्री से हो रही मुलाकातों ने अटकलों को और हवा दी है। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और कांग्रेस जैसे दल लंबे समय से पूर्ण राज्य की बहाली की मांग करते रहे हैं। वहीं, भाजपा ने भी कई मौकों पर संकेत दिए हैं कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है।
गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को स्पष्ट किया था कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करना स्थायी समाधान की दिशा में ज़रूरी कदम है। इसके बाद से इस विषय पर केंद्र की संजीदगी और बढ़ी है।
चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया को तेज़ करना भी इस ओर संकेत कर रहा है कि या तो जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तैयारी हो रही है, या फिर इसके ज़रिए पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
स्थानीय जनता में इस चर्चा को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई लोग इसे एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि जब तक ठोस घोषणा नहीं होती, तब तक इसे केवल "राजनीतिक रणनीति" ही माना जाना चाहिए।
सूत्रों की मानें तो आने वाले संसदीय सत्र में इस दिशा में कोई बड़ा ऐलान हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह जम्मू-कश्मीर के लिए एक नई राजनीतिक सुबह की शुरुआत हो सकती है, जहां लोकतंत्र फिर से अपनी जड़ें मज़बूत करेगा।
नज़र बनी हुई है...
5 अगस्त 2019 के बाद 5 अगस्त 2025 की तारीख एक बार फिर इतिहास लिख सकती है। क्या जम्मू-कश्मीर फिर से एक पूर्ण राज्य बनेगा? देश भर की निगाहें इस सवाल पर टिकी हुई हैं।