आईआईटी कैंपस में आत्महत्या पर सख्ती, निदेशक और विभागाध्यक्षों की तय होगी जवाबदेही

आईआईटी कैंपस में आत्महत्या पर सख्ती, निदेशक और विभागाध्यक्षों की तय होगी जवाबदेही

नई दिल्ली।
देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों, विशेषकर आईआईटी, में छात्रों द्वारा आत्महत्या के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अब यदि किसी आईआईटी या अन्य उच्च शिक्षण संस्थान के परिसर में छात्र आत्महत्या की घटना होती है और जांच में संस्थागत लापरवाही सामने आती है, तो निदेशक, डीन और विभागाध्यक्ष जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी।

केंद्र सरकार ने इस संबंध में आत्महत्याओं के कारणों की गहन समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता अनिल डी. सहस्रबुद्धे, अध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (NETF) कर रहे हैं। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

आईआईटी कानपुर की घटनाएं जांच के दायरे में

समिति हाल के दिनों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में दो छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं सहित अन्य मामलों की जांच करेगी। इसके साथ ही यह भी परखा जाएगा कि संस्थानों में पढ़ाई का दबाव, मानसिक तनाव और सामाजिक कारण किस हद तक इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं।

2023 की गाइडलाइन लागू हुई या नहीं, होगी पड़ताल

जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि उच्च शिक्षण संस्थानों ने जुलाई 2023 में शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी छात्रों के भावनात्मक और मानसिक कल्याण से जुड़ी गाइडलाइनों को लागू किया या नहीं। इन गाइडलाइनों में परामर्श सेवाएं, मेंटर-मेंटेई प्रणाली, प्रारंभिक चेतावनी तंत्र, आत्महत्या रोकथाम रणनीति और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) विकसित करने का प्रावधान है।

मनोचिकित्सक भी समिति में शामिल

समिति में मूलचंद अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल और शिक्षा मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। मंत्रालय का उद्देश्य सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और सहयोगात्मक वातावरण सुनिश्चित करना है।

दोष सिद्ध होने पर पद से हटाने तक की कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, सरकार निदेशक, कुलपति, प्रिंसिपल, डीन और विभागाध्यक्षों की स्पष्ट जवाबदेही तय करने की तैयारी में है। यदि जांच रिपोर्ट में यह सिद्ध होता है कि संस्थान ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों में लापरवाही बरती, तो संबंधित अधिकारियों पर जुर्माना लगाने, पद से हटाने जैसी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार का मानना है कि केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि छात्रों का मानसिक और भावनात्मक कल्याण भी उच्च शिक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी