न्यू साउथ वेल्स नेशनल्स पार्टी को नया नेता मिल गया है। कोफ़्स हार्बर के सांसद गुरमेश सिंह को बुधवार को पार्टी का निर्विरोध नेता चुना गया। डुगल्ड सॉन्डर्स के अचानक इस्तीफ़े के बाद सिंह ने यह पद संभाला है।
सिडनी में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सिंह ने प्रीमियर क्रिस मिन्स और उनकी लेबर सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा सरकार से उठता जा रहा है और अगला चुनाव नेशनल्स के लिए बड़ा अवसर होगा।
सिंह ने कहा,
“हमारे सामने कड़ी लड़ाई है, लेकिन मौजूदा सरकार की लोकप्रियता बेहद कमज़ोर है। दो-तिहाई पुरुष और तीन-चौथाई महिलाएँ क्रिस मिन्स को मुख्यमंत्री के रूप में पसंद नहीं करतीं। जनता उन्हें चमक-दमक वाला नेता मानती है, लेकिन सरकार केवल बात कर रही है, काम बहुत कम हो रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कार्यकाल के शुरुआती वर्षों में कई समीक्षाएँ तो शुरू कीं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस डिलीवरी नहीं हुई है।
गुरमेश सिंह किसी भी बड़े ऑस्ट्रेलियाई राजनीतिक दल का नेतृत्व करने वाले पहले भारतीय सिख मूल के नेता बन गए हैं। हालांकि, उन्होंने अपनी जातीय पहचान को राजनीति में मुद्दा बनाने से इंकार किया।
उन्होंने कहा,
“मैं खुद को हमेशा एक ऑस्ट्रेलियाई ही मानता हूँ। मेरी पृष्ठभूमि क्या है, यह लोग तय करें, मैं इससे न शर्माता हूँ न दूरी बनाता हूँ, लेकिन यह मेरी राजनीतिक पहचान नहीं है।”
सिंह ने कहा कि नेशनल्स पार्टी पहले भी विविध पृष्ठभूमि के नेताओं—जॉर्ज सौरिस और जॉन बारिलारो जैसे—को चुनते आई है और वे इस परंपरा को आगे बढ़ाएँगे।
ऊर्जा नीति पर पूछे गए सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य स्तर पर भी संघीय नेशनल्स की लाइन पर चलेगी।
उन्होंने कहा,
“अगले 100 वर्षों में ऊर्जा का रूप बदलेगा, इसलिए हमें तकनीक-तटस्थ होना पड़ेगा। मैं औद्योगिक डिज़ाइन पढ़ा हुआ हूँ, और मेरा मानना है कि न्यूक्लियर ऊर्जा को भी विकल्पों में शामिल करना चाहिए।”
सिंह के नेतृत्व में नेशनल्स के रुख में कठोरता और स्पष्टता दोनों की उम्मीद की जा रही है, खासकर ऊर्जा एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर जिन्हें पार्टी अपनी मुख्य ताकत मानती है।