एचएसबीसी की ताज़ा रिपोर्ट "अफ्लुएंट इन्वेस्टर्स स्नैपशॉट 2025" के अनुसार, भारत में आर्थिक रूप से सक्षम यानी संपन्न लोगों को एक सुरक्षित और आरामदायक रिटायरमेंट के लिए करीब 3.5 करोड़ रुपये (लगभग 4 लाख अमेरिकी डॉलर) की आवश्यकता होगी। यह आंकड़ा देश में लगातार बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और बढ़ती जीवन प्रत्याशा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पहले जहां भारतीय निवेशक यात्रा, बच्चों की शिक्षा और प्रॉपर्टी खरीदने जैसे अल्पकालिक लक्ष्यों को प्राथमिकता देते थे, वहीं अब दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है।
रिपोर्ट के अनुसार, सोने में निवेश ने पिछले वर्ष में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की है।
इसके बाद रियल एस्टेट और शेयर जैसे पारंपरिक विकल्प भी लोकप्रिय बने हुए हैं।
लोग अब वैकल्पिक निवेशों (alternate investments) जैसे म्यूचुअल फंड और मैनेज्ड इन्वेस्टमेंट की ओर भी रुझान दिखा रहे हैं।
एचएसबीसी का विश्लेषण बताता है कि जो लोग 30 की उम्र के शुरुआती वर्षों में निवेश की शुरुआत करते हैं, वे रिटायरमेंट को लेकर अधिक आश्वस्त नजर आते हैं। इसके विपरीत, देर से निवेश शुरू करने वालों को रिटायरमेंट के बाद की जीवनशैली को लेकर चिंता रहती है।
भारत की तुलना में अन्य देशों में रिटायरमेंट के लिए जरूरी बचत और भी अधिक है:
अमेरिका: $1.57 मिलियन (करीब ₹13 करोड़)
सिंगापुर: $1.39 मिलियन
हांगकांग: $1.1 मिलियन
चीन: $1.09 मिलियन
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारतीय निवेशक आर्थिक अनिश्चितता और मंहगाई को लेकर चिंतित हैं, लेकिन वैश्विक निवेशकों की तुलना में वे अपनी वित्तीय योजनाओं को लेकर अधिक आत्मविश्वासी हैं।