विनोद कापड़ी की पुरस्कार विजेता फिल्म ‘पायर’ — एक संवेदनशील हिन्दी-कुमाऊँनी ड्रामा, जो प्रेम, बुज़ुर्गावस्था और हिमालयी गाँवों में जीवटता की मार्मिक कहानी कहती है — अब भारतीय फिल्म महोत्सव मेलबर्न (IFFM) में प्रदर्शित होने जा रही है।
पहले ही लंदन, बर्मिंघम और टालिन जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में सराहना बटोर चुकी ‘पायर’ उत्तराखंड के एक वीरान गाँव में रह रहे बुज़ुर्ग दंपति के रिश्ते और जीवन संघर्ष की आत्मीय दास्तान है। बर्फ से ढके पहाड़, सूनी पगडंडियाँ और अकेलेपन के बीच बुनी गई यह कथा दर्शकों को भीतर तक छू लेती है।
फिल्म को अब तक मिले शानदार प्रतिसाद ने इसे अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के मंच पर एक विशेष पहचान दिलाई है। चर्चाओं के अनुसार, यदि सब कुछ योजना के अनुरूप रहा और सरकारी मंजूरी मिल गई, तो ‘पायर’ इस वर्ष भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि भी बन सकती है।
निर्देशक विनोद कापड़ी, जो अपनी धारदार कहानियों और मानवीय संवेदना के चित्रण के लिए जाने जाते हैं, ने ‘पायर’ को मात्र एक प्रेमकथा के रूप में नहीं, बल्कि बदलते समय में खोते गाँव, संस्कृति और संबंधों के दस्तावेज़ के रूप में रचा है।
कार्यक्रम: Indian Film Festival of Melbourne
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‘पायर’ न केवल कला और संवेदना का मेल है, बल्कि यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्रेम और साथ के बिना जीवन कैसा होता है, और बदलती दुनिया में अपनेपन का अर्थ क्या रह जाता है।