ऑकलैंड – न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था में आई गिरावट का असर अब बेरोज़गारी दर पर साफ़ दिखाई दे रहा है। जून तिमाही में देश की बेरोज़गारी दर बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले लगभग पाँच वर्षों में सबसे ऊँची है। इस दौरान 1.58 लाख लोग बेरोज़गार हो गए हैं।
आर्थिक सुस्ती के चलते कंपनियों ने बड़े पैमाने पर नौकरियाँ काटी हैं। वहीं, वेतन वृद्धि की दर भी घटी है—पिछले वर्ष जून में यह 4.3% थी, जो अब घटकर 2.4% रह गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस हालात के चलते न्यूज़ीलैंड से ऑस्ट्रेलिया की ओर पलायन में तेज़ी आएगी। वर्ष 2024 में न्यूज़ीलैंड से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले प्रवासियों की संख्या 30,000 रही, जो 2012 के बाद से सबसे ज़्यादा है।
इस प्रवास का असर ऑस्ट्रेलिया की रियल एस्टेट पर भी दिख सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज़्यादा प्रवासियों के आने से वहां घरों की मांग और कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि न्यूज़ीलैंड में मकान की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है।
हालांकि देश तकनीकी रूप से अब मंदी से बाहर है—पिछली दो तिमाहियों में GDP में वृद्धि दर्ज की गई है—मगर आर्थिक सुधार धीमी और अस्थिर बनी हुई है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापार शुल्कों का भी असर न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस ताज़ा गिरावट के बाद न्यूज़ीलैंड के रिज़र्व बैंक द्वारा इस महीने नीतिगत ब्याज दर में 0.25% की कटौती की संभावना है, जिससे यह दर 3% पर आ सकती है। तुलना करें तो ऑस्ट्रेलिया में यह दर फिलहाल 3.85% है।
वित्त मंत्री निकोला विलिस ने बेरोज़गारी दर को लेकर आशावाद जताया और कहा कि सरकार की $6 अरब की सार्वजनिक बुनियादी ढांचा योजनाएँ और तेज़ अनुमोदन प्रक्रिया आने वाले महीनों में रोज़गार में सुधार लाएंगी।
वहीं, विपक्षी लेबर पार्टी ने प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को आड़े हाथों लिया। पार्टी की वित्त प्रवक्ता बारबरा एडमंड्स ने कहा, “जब हज़ारों लोग बेरोज़गारी से जूझ रहे हैं, तब लक्सन सरकार केवल रियल एस्टेट निवेशकों और फॉसिल फ्यूल कंपनियों का भला कर रही है।”
BNZ बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री माइक जोन्स ने कहा कि देश की रोज़गार स्थिति "वास्तव में कठिन" है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जो आर्थिक सुधार हो रहा है, वह “ठहर-ठहर कर” हो रहा है, और अगले वर्ष तक रोज़गार बाज़ार में ठोस सुधार की संभावना कम है।
विश्लेषकों का मानना है कि न्यूज़ीलैंड को यदि आर्थिक रूप से मज़बूत बनाना है, तो न केवल निवेश बढ़ाना होगा बल्कि युवा प्रतिभाओं को देश में रोकने के उपाय भी करने होंगे।