संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्षी गठबंधन 'INDIA' की अहम बैठक शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित की गई। इस बैठक में जहां संसद में सरकार को घेरने की रणनीति पर मंथन हुआ, वहीं राहुल गांधी के एक हालिया बयान को लेकर वामपंथी दलों ने तीखी आपत्ति जताई। इसी के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) की गैरहाजिरी ने गठबंधन की एकता पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं।
बैठक से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक सार्वजनिक बयान को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अन्य वाम दलों ने नाराजगी जताई। वाम दलों का कहना है कि राहुल का यह बयान सहयोगियों के खिलाफ माहौल बनाने वाला है और इससे विपक्ष की सामूहिक रणनीति को नुकसान पहुंच सकता है। वाम दलों ने यह भी संकेत दिए हैं कि इस प्रकार की टिप्पणियों से बचना जरूरी है यदि INDIA गठबंधन को टिकाऊ बनाना है।
INDIA ब्लॉक की इस बैठक में आम आदमी पार्टी ने हिस्सा नहीं लिया। सूत्रों के अनुसार, AAP पहले से ही कांग्रेस और अन्य दलों के साथ साझा मंच पर अपने सीमित प्रभाव को लेकर असहज महसूस कर रही थी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब इस गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेंगे। यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब विपक्ष संसद में एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है।
बैठक में शामिल दलों ने मानसून सत्र को लेकर संयुक्त रणनीति तैयार की। प्रस्तावित रणनीति के अनुसार, सरकार को महंगाई, बेरोजगारी, कृषि संकट और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर घेरे जाने की योजना है। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, झामुमो, डीएमके और वाम दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि केंद्र सरकार की नीतियों और हालिया ‘SIR’ (Security Incident Report) से जुड़े मामलों के विरोध में विपक्ष जंतर-मंतर पर संयुक्त प्रदर्शन करेगा। यह प्रदर्शन प्रतीकात्मक होगा लेकिन विपक्ष का दावा है कि यह "लोकतंत्र की रक्षा" की दिशा में एक मजबूत संदेश देगा।
विपक्षी दल जहां सरकार पर हमलावर रुख अपनाने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं अंदरूनी मतभेद इस मुहिम को कमजोर कर सकते हैं। राहुल गांधी का बयान, वाम दलों की नाराजगी और AAP की दूरी यह संकेत देती है कि INDIA गठबंधन को अब अपनी अंदरूनी चुनौतियों से भी जूझना होगा।