रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 2026-27 के लिए ₹7.8 लाख करोड़ आवंटित

ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा तैयारी को बड़ी मजबूती

रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 2026-27 के लिए ₹7.8 लाख करोड़ आवंटित

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की सुरक्षा तैयारियों को और मज़बूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा मंत्रालय को ₹7.8 लाख करोड़ का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया है। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग ₹1 लाख करोड़ अधिक है। हालिया सैन्य घटनाक्रम और ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के बाद इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

सरकार के इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में भारत अपनी सैन्य क्षमता, आधुनिक हथियार प्रणालियों और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में है।

आधुनिकीकरण पर खास फोकस

इस बार रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी सैन्य आधुनिकीकरण पर खर्च किया जाएगा। इसके तहत फाइटर जेट, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन तकनीक, एयर डिफेंस सिस्टम और अत्याधुनिक हथियारों की खरीद और निर्माण को प्राथमिकता दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर भविष्य की युद्ध रणनीतियों को ध्यान में रखकर की गई है, जहां तकनीक और सटीक मारक क्षमता निर्णायक भूमिका निभाएगी।

मिसाइल और फाइटर जेट निर्माण को मिलेगी रफ्तार

बजट में की गई बढ़ोतरी से मिसाइल निर्माण कार्यक्रमों को नई गति मिलने की उम्मीद है। लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों, एयर-डिफेंस सिस्टम और एंटी-ड्रोन तकनीक पर विशेष निवेश किया जाएगा।
इसके अलावा भारतीय वायुसेना के लिए नए फाइटर जेट्स की खरीद और स्वदेशी लड़ाकू विमानों के उत्पादन को भी तेज़ किया जाएगा, ताकि स्क्वाड्रन की संख्या बढ़ाई जा सके और परिचालन क्षमता मजबूत हो।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई चुनौतियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक युद्ध केवल सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता से जीता जाता है।
इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस बार बजट में ड्रोन वारफेयर, साइबर सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस सिस्टम को भी अहम स्थान दिया है।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल

रक्षा बजट में बढ़ोतरी का एक बड़ा उद्देश्य ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देना भी है। स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण में DRDO, सरकारी उपक्रमों और निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ाई जाएगी। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि देश में रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

रणनीतिक संदेश

कुल मिलाकर, 2026-27 का रक्षा बजट न केवल सैन्य तैयारियों को मजबूत करता है, बल्कि यह भारत की रणनीतिक सोच और सुरक्षा प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है। बढ़ता रक्षा खर्च यह संकेत देता है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है।