नई दिल्ली: देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार बड़े कदम उठा रही है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार भारत में करीब 6,600 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण तेजी से जारी है, जिन्हें 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से देश की ऊर्जा क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और बिजली उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा बढ़ेगा।
केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि इन परमाणु परियोजनाओं के अलावा लगभग 7,000 मेगावाट क्षमता के अन्य परमाणु संयंत्र योजना और अनुमोदन के विभिन्न चरणों में हैं। वर्तमान में भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता 8,780 मेगावाट से अधिक है।
सरकार ने जलविद्युत क्षेत्र में भी बड़े निवेश की जानकारी दी है। मंत्री के अनुसार देश में इस समय 12,723.50 मेगावाट क्षमता की जलविद्युत परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा 4,274 मेगावाट क्षमता की अन्य जलविद्युत परियोजनाएं योजना के विभिन्न चरणों में हैं, जिन्हें 2031-32 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
देश में बिजली की बढ़ती मांग और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणालियों पर भी काम किया जा रहा है।
11,620 मेगावाट / 69,720 मेगावाट-घंटे की पंप स्टोरेज परियोजनाएं (PSP) निर्माणाधीन हैं।
6,580 मेगावाट / 39,480 मेगावाट-घंटे क्षमता वाली PSP परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है।
9,653.94 मेगावाट / 26,729.32 मेगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) का निर्माण जारी है।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 (जनवरी 2026 तक) में भारत ने 52,536.49 मेगावाट की नई स्थापित उत्पादन क्षमता जोड़ी है।
31 जनवरी 2026 तक देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 5,20,511 मेगावाट पहुंच गई है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का हिस्सा 2,63,189 मेगावाट (लगभग 50.6%) है।
विशेषज्ञों के अनुसार परमाणु ऊर्जा, जलविद्युत और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विस्तार से आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा व्यवस्था अधिक स्थिर, स्वच्छ और सुरक्षित बनेगी। सरकार का लक्ष्य है कि 2031-32 तक देश की ऊर्जा संरचना में बड़ा बदलाव लाया जाए और बढ़ती बिजली मांग को टिकाऊ स्रोतों से पूरा किया जाए।