वैश्विक आर्थिक वृद्धि में भारत अमेरिका से आगे, एलन मस्क बोले— शक्ति संतुलन बदल रहा है

वैश्विक आर्थिक वृद्धि में भारत अमेरिका से आगे, एलन मस्क बोले— शक्ति संतुलन बदल रहा है

वॉशिंगटन।
दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ताज़ा अनुमानों के अनुसार वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में भारत का योगदान अमेरिका से अधिक रहने वाला है। इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्योगपति एलन मस्क ने कहा है कि वैश्विक शक्ति संतुलन तेज़ी से बदल रहा है।

आईएमएफ के जनवरी 2026 के अनुमान बताते हैं कि वर्ष 2026 में वैश्विक वास्तविक जीडीपी वृद्धि में भारत और चीन मिलकर 43.6 प्रतिशत का योगदान देंगे। इसमें अकेले भारत की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि अमेरिका का योगदान 9.9 प्रतिशत आंका गया है। यह पहली बार है जब वैश्विक वृद्धि में भारत की भूमिका अमेरिका से अधिक बताई गई है।

एलन मस्क ने इन अनुमानों पर आधारित एक चार्ट साझा करते हुए कहा कि वैश्विक आर्थिक केंद्र अब पश्चिम से पूर्व की ओर खिसक रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया कई मोर्चों पर आर्थिक अस्थिरता और व्यापारिक तनावों का सामना कर रही है।

आईएमएफ के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था 2026 में 3.3 प्रतिशत और 2027 में 3.2 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। यह अनुमान अक्टूबर 2025 की तुलना में थोड़ा बेहतर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टेक्नोलॉजी क्षेत्र में मजबूत निवेश, सरकारों की वित्तीय और मौद्रिक नीतियों का समर्थन तथा निजी क्षेत्र की मजबूती ने वैश्विक व्यापार नीतियों में बदलाव के नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक संतुलित किया है।

रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक महंगाई धीरे-धीरे कम हो सकती है, हालांकि अमेरिका में महंगाई को लक्ष्य स्तर तक लाने में अभी कुछ समय लग सकता है।

भारत के लिए यह रिपोर्ट विशेष रूप से सकारात्मक मानी जा रही है। आईएमएफ ने 2025 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। इसके पीछे तीसरी तिमाही में बेहतर प्रदर्शन और चौथी तिमाही में मजबूत आर्थिक गति को कारण बताया गया है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2026 और 2027 में भारत की विकास दर घटकर लगभग 6.4 प्रतिशत रह सकती है, क्योंकि अस्थायी और चक्रीय कारकों का प्रभाव धीरे-धीरे कम होगा। इसके बावजूद, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।