अमेरिकी टैरिफ पर भारत सरकार का बड़ा कदम, वित्त मंत्री बोलीं- निर्यातकों के साथ मजबूती से खड़ी है सरकार

अमेरिकी टैरिफ पर भारत सरकार का बड़ा कदम, वित्त मंत्री बोलीं- निर्यातकों के साथ मजबूती से खड़ी है सरकार

नई दिल्ली, 29 अगस्त 2025।
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत सरकार ने निर्यातकों को भरोसा दिलाया है कि उनके हितों की हर हाल में रक्षा की जाएगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को निर्यात संगठनों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान कहा कि सरकार ने निर्यात संवर्धन मिशन पर काम तेज़ कर दिया है और संकट की घड़ी में निर्यातकों को राहत पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।


सरकार का आश्वासन

वित्त मंत्री ने कहा कि यह चुनौती अल्पकालिक है और दीर्घकाल में भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका असर सीमित रहेगा। उन्होंने निर्यातकों से कहा कि सरकार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिये निर्यात को बढ़ावा देने पर भी काम कर रही है, ताकि छोटे-बड़े व्यापारी वैश्विक बाजारों तक आसानी से पहुंच सकें।


25,000 करोड़ रुपये का पैकेज

केंद्र सरकार ने बजट में घोषित निर्यात संवर्धन मिशन को अगले छह वर्षों (2025–2031) में लागू करने का रोडमैप तैयार किया है।

  • इस योजना पर करीब 25,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

  • इसके तहत दो उप-योजनाएं बनाई गई हैं— निर्यात प्रोत्साहन (10,000 करोड़ रुपये से अधिक) और निर्यात दिशा (14,500 करोड़ रुपये से अधिक)।


एमएसएमई को राहत

सरकार आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना, निर्यात ऋणों पर स्थगन (moratorium) और भुगतान अवधि बढ़ाने जैसे उपायों पर विचार कर रही है। इससे छोटे और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) निर्यातकों को नकदी प्रवाह की समस्या से राहत मिलेगी और उनके परिचालन में रुकावट नहीं आएगी।


रूस से तेल आयात बढ़ाने का निर्णय

अमेरिकी दबाव को दरकिनार करते हुए भारत ने सितंबर से रूस से कच्चे तेल का आयात 10–20% तक बढ़ाने का फैसला किया है। यह बढ़ोतरी प्रतिदिन 1.5 से 3 लाख बैरल तक हो सकती है। सरकार ने इसे ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों के मद्देनजर ज़रूरी बताया।


व्यापार समझौते पर फिलहाल ठहराव

वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर फिलहाल औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है। उनका कहना है कि जब तक अतिरिक्त 25% टैरिफ पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।


आरबीआई की चेतावनी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि अमेरिकी व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताएं घरेलू अर्थव्यवस्था की मांग पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। हालांकि, महंगाई दर निकट भविष्य में 4% से नीचे रहने का अनुमान है।
आरबीआई का मानना है कि—

  • अच्छे मानसून और ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि से गांवों की मांग बढ़ेगी,

  • एसएंडपी द्वारा भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार से पूंजी प्रवाह में तेजी आएगी,

  • वित्तीय स्थितियों में सुधार और ब्याज दरों में कटौती से अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा