नई दिल्ली।
बांग्लादेश में बिगड़ते सुरक्षा हालात और आगामी संसदीय चुनावों को देखते हुए भारत ने बड़ा एहतियाती कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिक और अन्य अधिकारियों के परिवारों को स्वदेश वापस बुलाने का फैसला किया है। इसके साथ ही बांग्लादेश को अस्थायी रूप से ‘नॉन-फैमिली पोस्टिंग’ की श्रेणी में रखा गया है।
सूत्रों के मुताबिक यह निर्णय अगले महीने होने वाले आम चुनावों के दौरान संभावित हिंसा और अस्थिरता की आशंका के मद्देनजर लिया गया है। राजनयिकों को अपने परिवारों को भारत भेजने का निर्देश एक जनवरी को दिया गया था। सभी परिवारजन 15 जनवरी तक भारत लौट चुके हैं।
जिन अधिकारियों के बच्चे बांग्लादेश के स्कूलों में अध्ययनरत नहीं थे, उन्हें 8 जनवरी तक लौटने के निर्देश दिए गए थे, जबकि अन्य को 15 जनवरी तक की समय-सीमा दी गई थी। हालांकि भारत सरकार की ओर से इस फैसले की औपचारिक पुष्टि अब तक नहीं की गई है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश में चुनावी नतीजे आने के बाद हालात की समीक्षा की जाएगी और सुरक्षा स्थिति में सुधार होने पर फैसले पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
यह कदम अचानक या जल्दबाजी में नहीं उठाया गया है। शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों में लगातार तनाव देखने को मिल रहा है। भारत पहले ही बांग्लादेश के लिए वीजा सेवाएं निलंबित कर चुका है।
इसके अलावा बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों और हत्याओं को लेकर भी भारत की चिंता बढ़ी है। हाल ही में उस्मान हादी की हत्या के मामले में बांग्लादेश द्वारा भारत पर लगाए गए साजिश के आरोपों ने द्विपक्षीय संबंधों में और तल्खी पैदा कर दी है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह फैसला सुरक्षा प्राथमिकताओं के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर बढ़ती चिंता को भी दर्शाता है।